लेखक: श्री संजय अग्रवाल
प्रदेश अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश
19 मार्च 2026, गुरुवार को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से **चैत्र नवरात्रि** का शुभ आरंभ हो गया है। और पूरे देश में मातृशक्ति की आराधना, घटस्थापना, जप, अनुष्ठान और व्रत शुरू हो चुके हैं। यह नौ दिवसीय पावन पर्व **माता दुर्गा** के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक — की उपासना का समय है। लेकिन इसी पवित्र समय में एक अश्लील गाना “सरके चुनर तेरी सरके” (फिल्म KD: The Devil का हिंदी वर्जन) सोशल मीडिया पर फैल रहा है, जिसके बोल और दृश्य महिलाओं को मात्र भोग की वस्तु बनाते हैं। यह न केवल सनातन मर्यादा का अपमान है, बल्कि आज से शुरू हुई नवरात्रि में मातृशक्ति की महिमा पर सीधा प्रहार है।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश की ओर से मैं इस गाने, इसके गीतकार रकीब आलम, निर्माता, निर्देशक और कलाकारों (नोरा फतेही, संजय दत्त) की कड़ी भर्त्सना करता हूँ। वकील विनीत जिंदल की शिकायत पर NHRC द्वारा CBFC, I&B मंत्रालय और Google को जारी नोटिस स्वागतयोग्य है, लेकिन हमें अब मातृशक्ति के नाम पर और सशक्त संघर्ष करना होगा।
सनातन धर्म नारी को कभी भी वस्तु या भोग की वस्तु नहीं मानता। वह तो ‘शक्ति’ का स्वरूप है! देवी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, सीता और राधा के रूप में हम नारी की पूजा करते हैं।
ऋग्वेद से लेकर मनुस्मृति तक शास्त्रों में बार-बार कहा गया है:
“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”
(जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं।)
देवी महात्म्य में लिखा है — “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता” — अर्थात् हर प्राणी में शक्ति रूप में देवी विराजमान हैं। सनातन संस्कृति में स्त्री को माता, बहन, पत्नी और पुत्री के रूप में सम्मान दिया जाता है। रामायण में भगवान राम ने सीता माता की रक्षा के लिए समुद्र लांघा। महाभारत में द्रौपदी की गरिमा के लिए युद्ध हुआ।
काम-भावना को भी सनातन में पवित्र माना गया है, लेकिन वह केवल गृहस्थ आश्रम की पवित्रता में, ब्रह्मचर्य और संयम के साथ। कला और संगीत को नाट्यशास्त्र में मर्यादा के साथ स्थान दिया गया था — वह मन को ऊँचा उठाती थी, विकृत नहीं करती थी।
आज यह गाना ठीक उलटा कर रहा है। इसके बोल जैसे “पहले उठाले, अंदर वो डाले… चूसेगा या चाटेगा” महिलाओं को मात्र शारीरिक भोग की वस्तु बना देते हैं। यह सनातन की मर्यादा, लज्जा और परिवार की पवित्रता का घोर उल्लंघन है।
पाश्चात्य प्रभाव vs सनातन संस्कृति — युवा पीढ़ी खतरे में
हमारी सनातन संस्कृति ने कभी भी अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दिया। लेकिन आज कुछ फिल्ममेकर पाश्चात्य ‘फ्रीडम’ की आड़ में हमारे बच्चों के मन में विकृति भर रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के बच्चे इन गानों को सुन रहे हैं। क्या हम चाहते हैं कि हमारी बेटियाँ ‘शक्ति’ के बजाय ‘ऑब्जेक्ट’ बनें?
सनातन दर्शन हमें सिखाता है — “धर्मो रक्षति रक्षितः”। जो धर्म (सनातन संस्कृति) की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। अगर हम आज चुप रहे तो कल हमारी बेटियों, बहनों की गरिमा सुरक्षित नहीं रहेगी।
मध्य प्रदेश — सनातन की पावन भूमि, जहाँ भगवान महाकाल, ओंकारेश्वर की परंपरा है — यहाँ ऐसे अश्लील कंटेंट को कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
**इस गाने का अपराध — मातृशक्ति का अपमान**
नवरात्रि के समय जब हम माता को **शक्ति** के रूप में पूज रहे हैं, तब ऐसे कंटेंट मातृशक्ति का अपमान हैं। यह पाश्चात्य विकृति है जो हमारी युवा बेटियों को ‘ऑब्जेक्ट’ बनाने की साजिश है। क्या हम चाहते हैं कि हमारी बेटियाँ शैलपुत्री, कात्यायनी बनें या भोग की वस्तु?
**हमारी अपील — मातृशक्ति की रक्षा में उठें**
1. **पूर्ण बहिष्कार:** इस गाने, फिल्म और कलाकारों का सोशल मीडिया, यूट्यूब पर बहिष्कार करें।
2. **नवरात्रि में संकल्प:** इन नौ दिनों में माता की आराधना के साथ ऐसे कंटेंट के खिलाफ जागरूकता फैलाएं।
3. **सरकार से मांग:** CBFC और IT Rules में सख्ती, obscene content पर तत्काल रोक।
4. **सकारात्मक सृजन:** सनातन मूल्यों पर गाने, फिल्में बनाएं — माता की महिमा गाएं।
5. **माफी की मांग:** सभी पक्ष सार्वजनिक माफी मांगें और भविष्य में मर्यादा का पालन करें।
मातृशक्ति की जय हो! हमारी बेटियाँ देवी का रूप हैं। हम उन्हें कभी अपमानित नहीं होने देंगे।
