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नलखेड़ा। जिस प्रकार आम के पेड़ पर आम के फल ना लगे तो वह आम का पेड़ व्यर्थ है इसी प्रकार मनुष्य जीवन में अगर भजन कीर्तन नहीं किया तो मानव जीवन भी व्यर्थ है।
उक्त बात तहसील क्षेत्र के ग्राम गुदरावन में पाटीदार धर्मशाला में चल रही शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पंडित आशीष शर्मा ने अपने प्रवचन में कहीं।
उन्होंने कहा कि जैसे भोजन में नमक के नहीं होने से भोजन में स्वाद नहीं आता है वैसे ही मानव जीवन बड़ा अनमोल है और जीवन में भगवान की भक्ति आराधना नहीं की है तो आपका जीवन बेकार है।
पंडित शर्मा ने कहा की हमें भगवान राम से कुछ नहीं मांगना चाहिए अगर मांगना है तो भगवान राम को ही मांग लो तो जो नहीं मांगोगे वहां भी इतना मिलेगा कि आप कल्पना भी नहीं करोगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान कृष्ण से सुदामा जी ने कुछ नहीं मांगा पर भगवान कृष्णा ने सुदामा जी को इतना दिया कि सुदामा जी भी आश्चर्य चकित हो गए।
उन्होंने कहा कि जीवन में कभी भी अभिमान नहीं करना चाहिए आपका जीवन सादा जीवन उच्च विचार की तर्ज पर होना चाहिए
पंडित शर्मा ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा जब नारद जी काम पर विजय प्राप्त कर लेते हैं और देव ऋषि नारद देवाधिदेव महादेव के पास जाते हैं शंकर भगवान ने देखा कि देव ऋषि नारद आए हैं तो उन्हें प्रणाम किया। महादेव ने कहा है कि कोई ऋषि कोई उपासक कोई संत घर आया है तो उसका सम्मान करना सीखिए। पुरी शिवमहापुराण कथा को उठाकर देख लीजिए चौबीस हजार श्लोक की यह कथा है, पूरी कथा में किसी भी देवी या देवता की कहीं भी निंदा नहीं की गई है। परंतु यह लिखा गया है कि शंकर करुणा कृपा और दया कैसे करते हैं।
जब नारद जी ने शिव जी से कहा कि जिस कामदेव पर आप नहीं विजय कर पाए उस पर मैं विजय प्राप्त कर चुका हूं,मैंने स्वयं जीता है। भगवान शंकर सिंहासन से उठकर अपने गले की रुद्राक्ष की माला देवऋषि नारद के गले में डाल दी। कोई साधक कोई उपासक अपने गले की माला उतार कर आपके गले में डाल रहा है तो इसका मतलब यह है कि मेरे परमात्मा के चित्र में, जो मेरे चित्र में राम नाम की माला जपी हुई है वह मेरे मालिक के माध्यम से तुम्हारे सीने तक जाए और तुम्हारे अंदर उतर जाए तुम्हारे हृदय उतर जाए।
कथा में आसपास के ग्रामों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण करने आ रहे हैं।
