तराना : मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर एक बार पुनः मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को स्मरण दिलाने हेतु प्रदेशव्यापी पोस्टकार्ड अभियान का आयोजन किया गया।
यह अभियान प्रदेश अध्यक्ष शलभ भदौरिया के निर्देशानुसार मंगलवार 15 जुलाई को एक साथ प्रदेश की समस्त जिला एवं ब्लॉक इकाइयों द्वारा चलाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम हजारों की संख्या में पोस्टकार्ड प्रेषित किए गए।
ज्ञात हो कि विगत 26 मार्च 2025 को मुरैना में आयोजित दो दिवसीय त्रिवार्षिक प्रांतीय महाधिवेशन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्यातिथि एवं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर विशेष अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए थे। इस अवसर पर संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने पत्रकारों की प्रमुख छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को मंच से सौंपा था।
मुख्यमंत्री ने स्वयं मंच से इन मांगों पर शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया था, किन्तु तीन माह बीत जाने के पश्चात भी कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। इसी क्रम में तराना ब्लॉक इकाई द्वारा भी इस अभियान में सहभागिता करते हुए स्थानीय पत्रकारों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री महोदय को पोस्टकार्ड लिखे। यह पोस्टकार्ड अभियान पत्रकारों की अधिकारों की आवाज़ को बुलंद करने का प्रयास है।
( श्रमजीवी पत्रकार संघ की पत्रकारों के हितों में प्रमुख छह सूत्रीय मांगे इस प्रकार हैं )
1, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाए। , 2. मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन जिसे पूर्व में शासन द्वारा ध्वस्त किया गया था, उसे पुनः पत्रकारों को प्रदान किया जाए। , 3. श्रद्धानिधि योजना से अधिमान्यता की शर्त हटाकर इसे जीवनपर्यन्त लागू किया जाए। , 4. प्रदेश के प्रत्येक जिले में पत्रकार भवन हेतु निशुल्क भूमि उपलब्ध कराई जाए।, 5. टोल टैक्स में छूट हेतु श्रमजीवी पत्रकार संघ के सदस्यता कार्ड को मान्यता दी जाए। , 6. उत्तरप्रदेश सरकार की भांति पत्रकारों के लिए निःशुल्क बीमा योजना लागू की जाए। इस अवसर पर तराना ब्लॉक इकाई के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें जिला उपाध्यक्ष किशन जोशी, ब्लॉक अध्यक्ष विपिन मित्तल, महासचिव सैय्यद नियामत अली, पीयूष कलोशिया, नईम आफताब, लखन भाटी, कमल मालवीय, अजय परमार एवं नवीन राठौर , श्रवण व्यास सहित अनेक पत्रकार साथी उपस्थित रहे। इस अवसर पर पत्रकारों ने एक स्वर में कहा कि यदि शीघ्र ही इन मांगों पर सरकार द्वारा सार्थक निर्णय नहीं लिया गया, तो संघ को और अधिक व्यापक स्तर पर संघर्ष के लिए बाध्य होना पड़ेगा।