नई दिल्ली / बाड़ोली (माधव एक्सप्रेस/ ऊषा माहना )
जैन समाज के अत्यंत पूज्य संत, परम श्रद्धेय मुनिश्री प्रकाशमुनिजी म.सा. ‘निर्मय’ के 29 मई को एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में हुए आकस्मिक देवलोकगमन ने पूरे देश के श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया। संयम, साधना और करुणा की प्रतिमूर्ति मुनिश्री ‘निर्मय’ का निधन जैन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
गुजरात के सूरत-बाड़ोली हाईवे पर प्रातः पदविहार के दौरान उन्हें एक तेज़ गति से आते वाहन ने टक्कर मार दी, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। इस अत्यंत दुखद समाचार से समूचा जैन समाज शोकाकुल हो उठा।
इस अमूल्य क्षति पर ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस द्वारा 30 मई को जैन भवन, 12 शहीद भगत सिंह मार्ग, नई दिल्ली में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अतुल जैन, महामंत्री श्री अमित राय जैन, वरिष्ठ पदाधिकारी श्री जसवंत जैन , राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष श्री विपुल जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य सदस्य, साधर्मी बंधु एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभा में मुनिश्री को श्रद्धांजलि अर्पित कर, दो मिनट का मौन रखकर तथा सामूहिक प्रार्थना व प्रतिक्रमण के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर आल इंडिया स्थानकवाशि के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अतुल जैन ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा:
> “पूज्य मुनिश्री ‘निर्मय’ न केवल एक तपस्वी थे, बल्कि वे संयम, शांति और साधना के मूर्त प्रतीक थे। उनका असमय विछोह जैन समाज की आध्यात्मिक विरासत को गहरी पीड़ा देने वाला है। उनका जीवन हमें आजीवन प्रेरणा देता रहेगा।”
दुर्घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने यह भी कहा:
> “दोषी वाहन चालक के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाह घटनाओं से हमारे संतों का जीवन संकट में न पड़े।”
श्री अतुल जैन ने आगे समाज को सजग करते हुए कहा कि यह समय आत्ममंथन का है। विहाररत संतों की सुरक्षा के लिए एक सुनियोजित और सशक्त सुरक्षा ढांचा विकसित किया जाना चाहिए ताकि साधुओं का विहार सुरक्षित, सुगम और निर्भय हो सके।
श्रद्धांजलि सभा के अंत में सामूहिक मंगल भावना, प्रार्थना एवं स्मरण-क्रम के द्वारा मुनिश्री की आत्मा की शांति हेतु सभी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
> पूज्य आत्मा को शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।
