निप्र, जावरा मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की जावरा कृषि उपज मंडी भृष्टाचार के मामले में सदैव अव्वल रही है,लेकिन न कृषि मंत्री कमल पटेल का इस ओर रुख है और न क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रदेश मंडी बोर्ड अधिकारियों का जिसके कारण मंडी प्रांगण की व्यवस्था दिन प्रतिदिन अस्त व्यस्त होती जा रही है जिसका बड़ा खुलासा आर .पी .एस नैन पूर्व मंडी सचिव के वायरल वीडियो और ऑडियो से साफ स्पस्टीकरण रूप से हुआ है जिसमे टोकन व्यवस्था को लेकर पैसे की मांग करते मंडी सचिव पाए गए,लेकिन मंडी बोर्ड द्वारा सिर्फ निलंबित ओर जांच तक ही मामला दबा रह गया जिसमें संलिप्त कर्मचारी वर्तमान में भी कार्यरत है लेकिन मंडी बोर्ड का कोई ध्यान नही वही चार जोन में मंडी प्रांगण होने के बाद भी सिर्फ मंडी कमेटी में एक शौचालय बना है जोकि प्रांगण से बाहर है ओर दूसरा बंद पड़ा है, मंडी में कार्यरत व्यापारी, तुलावटी, व हम्माल से लेकर दैनिक मजदूरी करती महिलाओं, पुरूषों ओर किसानों के लिए शौचालय व्यवस्था पूर्णतः नदारद है , पानी की प्याऊ के करीब ही खुले में शौच किया जाता है,वही चारो ज़ोन में मंडी कमेटी द्वारा फ़िल्टर वाटर युक्त पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही की गई है,जिससे गर्मी के दिनों में पीने के पानी के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता है,जिसका ध्यान मंडी सचिव व जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक नही दिया गया वही कुछ ही समय पूर्व मंडी से चोरी हुई सोयाबीन ट्राली ने भी मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे जिस पर नवीन मंडी सचिव द्वारा मंडी में सुरक्षा कर्मियों की कमी बता कर टाल दिया गया आखिर एक सोयाबीन ट्राली के शाम के समय चोर द्वारा चोरी करना ओर मंडी कमियों का ध्यान न होना इस बात को साफ करता है कि मंडी प्रांगण से बिना अनुज्ञा के मंडी टैक्स दिए भी मंडी कर्मियों व मंडी माफियाओं की साठ गांठ को बढ़ावा देती होगी? यदि ट्रॉली चेक पोस्ट या एंट्री सिस्टम के देखरेख से रिकॉर्ड में होती तो शायद चोरी न होती ,मध्यप्रदेश राज्य में कृषि उपजों का बेहतर नियमन एवं नियंत्रण स्थापित करने, कृषि उपज के उत्पादको को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने एवं उन्हें शोषण से मुक्त कराने, विक्रेताओं एवं क्रेताओं को सर्व सुविधायुक्त बाजार उपलब्ध कराने तथा मंडियों में बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने के लिये मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी अधिनियम के अंतर्गत मंडियों का गठन किया गया लेकिन शासन और शासन के कुछ भृष्टअधिकारियों की लूट ही के कारण ही वर्तमान में मंडी का अनुमानित राजस्व भी शायद पन्नों पर ही रह जाता है व करोडों की टैक्स चोरी सिर्फ चंद रुपयों ओर लापरवाही के कारण मध्यप्रदेश विकास व निर्माण से लेकर कृषकों के हितैषी कार्यों को धूमिल कर भ्र्ष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है,मंडी सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी आड़े हाथ लेकर भृष्टाचार को बढ़ावा दे रहे है।
