इंदौर के सबसे बड़े गरबा आयोजनों में शामिल होगा ‘ढोली तारा 5.0’, दोगुने क्षेत्र में सजेगा गरबा का भव्य मंच
Spread the loveइंदौर। नवरात्रि के रंग में रंगने...
Spread the loveइंदौर। नवरात्रि के रंग में रंगने...
Spread the loveलॉन्च ऑफर- जीरो लॉगिन फीस और...
Spread the love00 शासकीय हेलीकॉप्टर का बीमा दावा...
रायपुर, 3 फरवरी । संत गहिरा गुरु और माता पूर्णिमा के योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। माता पूर्णिमा का जीवन पूरी तरह से त्याग, तपस्या और समाज सेवा की अद्वितीय मिसाल प्रस्तुत करता है। उनका विग्रह समाज के कल्याण के प्रति उनके अडिग समर्पण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सोमवार को श्रीकोट आश्रम बलरामपुर में संत गहिरा गुरु की धर्मपत्नी पूर्णिमा के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के विशेष अवसर पर यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि, संत गहिरा गुरु ने गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी समाज की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने दीन-हीन और असहायों की सेवा को अपना परम धर्म माना और सत्य, शांति, दया और क्षमा के सिद्धांतों को धर्म के अमूल्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया।मुख्यमंत्री साय ने संत गहिरा गुरु द्वारा आदिवासी समुदायों के उत्थान में दिए गए अतुलनीय योगदान की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएं दी और उन्हें आह्वान किया कि वे माता पूर्णिमा जी और संत गहिरा गुरु जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारते हुए समाज को एक नई दिशा देने हेतु मनोयोग से जुट जाएं। समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
