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निप्र,जावरा (लखन पंवार)मध्यप्रदेश सरकार कि आदिम जाति कल्याण विभाग कि सूची में चाहे ( आरक्षण प्रकोष्ठ ) में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों की लिस्ट सूचीबद्ध हों और शासन समय समय पर आदिम जाति जन जातीय और घुम्मकड़ जातियों के विकास को लेकर बदलाव हेतु संशोधन कर उन्हें आर्थिक लाभ भी देना चाहे तो भी उन जातियों को प्रशासनिक राजस्व विभाग के प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती हैं, ऐसे में जनजातियों के पैतृक रिकॉर्ड को लेकर राजस्व विभाग द्वारा प्रश्न किया जाता हैं चाहे वह वहीं का निवासी हो वंशावली और स्थाई प्रमाणीकरण के होने पर भी उन्हें एसडीएम के सवालों से जूझना पड़ता हैं, पटवारी ओर तहसीलदार के हस्ताक्षर के बाद भी एसडीएम आवेदन को अमान्य कर देते हैं ऐसा ही मामला रतलाम ज़िले में सामने आया है जहां जिले के जावरा तहसील के एस.डी.एम कार्यालय में वर्तमान एस.डी.एम त्रिलोचन गौड़ के विभागीय जाति प्रमाण पत्र पर मंथन करने वाली टीम चाहे पटवारी ओर तहसीलदार द्वारा मूल निवासी के रुप में जाति प्रमाण पत्र बनाने वाले आवेदक के फार्म पर हस्ताक्षर कर देती हो लेकिन अंत में कभी कार्यालय से वंशावली तो कभी 1950 से 76 तक के पैतृक रिकॉर्ड की मांग कर कार्यालय के चक्कर लगवाया जाता हैं जिसकी सूचना पर माधव एक्सप्रेस न्यूज़ द्वारा आम जन कि शिकायत पर जाति प्रमाण पत्र को लेकर मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग ( आरक्षण प्रकोष्ठ ) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग को जाति प्रमाण पत्र जारी करने संबंधी निर्देश से जानकारी लेने पर पाया गया कि निर्धारित प्रारूप में आवेदन के साथ संलग्न किये जाने वाले आवश्यक दस्तावेज आवेदक को प्रारूप कंडिका-3 में उल्लेखित निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र के साथ आवेदक के पास उपलब्ध ऐसे दस्तावेज संलग्न करना होगें जिससे- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के मामले में उनकी जाति तथा आवेदक / उसका परिवार की वर्ष 1950 या उससे पूर्व म.प्र. में निवास की पुष्टि होती हो या अन्य पिछड़े वर्गों के मामले में उसकी जाति तथा वर्ष 1984 की स्थिति में या उसके पूर्व म.प्र. में निवास की पुष्टि होती हो। या परिवार के किसी सदस्य (पिता/चाचा/भाई/बहिन या दादा) को वर्ष 1996 के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र।परिवार की वर्ष 1950 में निवास की पुष्टि हेतु दस्तावेज (जो उपलब्ध हो) शिक्षा/शासकीय सेवा/मतदाता परिचय पत्र/परिवार के सदस्य (दादा/दादी/परदादा/परदादी पिता/माता/चाचा/भाई/बहिन) के नाम दर्ज अचल सम्पत्ति का रिकार्ड (भूमि/भूखण्ड / मकान की रजिस्ट्री या अन्य कोई राजस्व रिकार्ड आदि) की छायाप्रति या स्वयं आवेदक के शैक्षणिक योग्यता संबंधी प्रमाण पत्रों की छायाप्रति। जाति एवं निवास की तिथि के संबंध में संलग्न घोषणा पत्र ,आवेदक जिनके पास वर्ष 1950 (अन्य पिछड़े वर्गों के लिये 1984) में मध्यप्रदेश में निवास संबंधी दस्तावेज नहीं हैं,ऐसे आवेदकों से जिनके पास वर्ष 1950 (अन्य पिछड़े वर्गों के लिये 1984) या उससे पहले से मध्यप्रदेश का निवासी होने संबंधी लिखित रिकार्ड नहीं है, तो उसे यह लिखित रिकार्ड प्रस्तुत करने हेतु विवश न किया जाए, वहीं राजस्व अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर / कैम्प में जांच कर आवेदन पत्र में उल्लेखित जानकारी की पुष्टि करना चाहिये। इसके लिये आवेदक/संबंधित सरपंच/पार्षद / उस ग्राम, मोहल्ले के संभ्रान्त व्यक्तियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किये जाना चाहिये और स्वयं की संतुष्टि के बाद स्थाई जाति प्रमाण पत्र जारी करने की अनुशंसा करना चाहिये जैसा कि मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेशित किया गया है बावजूद इसके आम जन विभाग के चक्कर लगाने को विवश है जैसे वे किसी अन्य राज्य के वासी हो, परिवार के किसी सदस्य के जाति प्रमाण पत्र कि छाया प्रति को ओर सत्यापित प्रति के बाद भी जावरा एसडीएम गौड़ जाति प्रमाण पत्र को मान्य न कर 1950 के रिकॉर्ड मांगने में लगते हैं, आवेदक कहते हैं एस.डी.एम गौड़ से बात करने पर वह बहस न करने का कह कर टाल देते हैं,ऐसे में जाति प्रमाण पत्र के लिए दफ्तर आए दिहाड़ी मजदूर कार्यालय का चक्कर लगा अपना समय बर्बाद कर देते हैं, समस्या से परेशान कालूखेड़ा सेमलिया निवासी डालूराम पिता भेरूलाल लुहार ने बच्चों का जाति प्रमाण पत्र का आवेदन दिया था जो शुरू में ही रिजेक्ट कर दिया फ़िर पूछा तो कहा सन् 84 का रिकॉर्ड लगाओ ,फिर कहा किसी का जाति प्रमाण पत्र हो तो लगाया फ़िर अमान्य कर दिया ऐसे 12 से 15 चक्कर कार्यालय के कटवा दिए , फिर कहने हैं ख़सरा नक़ल लाओ आवेदक ने कहा कि दो बालिका और एक बालक के स्कूल में जाति प्रमाण पत्र कि मांग को लेकर आवेदन दिया, आवेदक ने परेशान होकर रतलाम ज़िला कलेक्टर राजेश बाथम को कॉल पर जाति प्रमाण पत्र की समस्या के संबंध में अवगत कराया है।
