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दीप प्रज्जवलन के पश्चात अतिथियों द्वारा प्रस्तुति हेतु पधारे सभी कलाकारों एवं सहयोगी कलाकारों का दुपट्टा, प्रसाद व स्मृति चिन्ह़् देकर स्वागत व सम्मान किया गया।

महोत्सव की प्रथम प्रस्तुति में पुणे के कलाकारों सुश्री नम्रता गायकवाड और श्री प्रमोद गायकवाड ने भगवान् शिव की आराधना में शहनाई वादन किया | राग श्याम कल्याण से प्रारम्भ हुई प्रस्तुति के अंत में भजन से कार्यक्रम का समापन किया | संगतकार में शहनाई पर श्री हितेश सालुके तथा तबले पर श्री सागर ने संगत की |
दूसरी प्रस्तुति का प्रारंभ शर्मा बंधुओं ने राग यमन में देव देव महादेव से किया । राग शिवरंजनी में बरसे बदरिया सावन की, राग मालकौंस में जय महेश जटा जूट, कंठ सोहे काल कूट तथा अंतिम प्रस्तुति राग दरबारी में राम जपें शिव जी का नाम, शिवजी जपते सदा श्री राम से समापन किया | गायक कलाकार शर्मा बंधू पंडित राजीव शर्मा, पंडित मुकेश शर्मा, पंडित शैलेश शर्मा, पंडित मिथिलेश शर्मा तथा संगतकारों में वायलिन पर श्री रवीन्द्र राव, की बोर्ड श्री अभिषेक सिंह चौहान, तबला पर श्रीअरूण कुशवाह, ढोलक पर श्री अखिलेश शर्मा तथा ऑक्टोपैड पर श्री हरीश शेर ने संगत की।
महोत्सव की अंतिम प्रस्तुति के रूप में मुंबई की प्रख्यात कथक नृत्यांगना सुश्री निकिता बनावलीकर ने कथक नृत्य के माध्यम से शिव आराधना की |
इस प्रस्तुती में सुश्री निकिता ने शिव स्तुति से आरम्भ करते हुए परम्परागत तीन ताल में उठान, आमद, परमेलु, परन, तत्कार आदि का समावेश किया | भाव पक्ष में कथक के आदि देव कृष्ण और राधा पर आधारित ठुमरी की प्रस्तुति के साथ महोत्सव का समापन हुआ। संगतकार के रूप में श्री तनय रेगे ने तबले पर, सुश्री शुभदा गायकवाड़ ने संवादिनी पर, तथा श्री आदित्य आप्टे ने गायन पर संगत की।

मंच संचालन श्री दीपक कोडपे द्वारा किया गया।
