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इंदौर – सिनेमा समाज का आइना होता है, यह किसी भी बात को लाखों करोड़ों लोगों तक पहुंचाने का सबसे अच्छा माध्यम होता है। बॉलीवुड और हॉलीवुड के बाद अब रीजनल (क्षेत्रीय) सिनेमा का दौर शुरू हो गया है।
इन दिनों रीजनल फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई कर रही हैं। ऐसे में इसी को आगे बढ़ाने के लिए पॉपकॉर्न फिल्म्स 5 अप्रैल को सिनेमाघरों में फिल्म मेरी मां कर्मा लेकर आ रहे हैं। यह एक पूर्ण पारिवारिक-एंटरटेनर फिल्म है। इस फिल्म को देखते हुए आपको जितना मजा आएगा, उतना ही रोना भी आएगा। इसके साथ ही मेरी मां कर्मा की कहानी से आपको मोटिवेशन मिलेगा। मोटिवेशन भी ऐसा कि आप अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की हिम्मत करेंगे। यह फिल्म हिंदी भाषा में रिलीज हो रही है। यह पॉपकॉर्न की पहली फिल्म नहीं है। इसके पहले ले चलहुं अपनी दुआरी का भी निर्माण कर चुके हैं। इस फीचर फिल्म की खास बात यह है कि इसे 25 साल की आरुषि बागेश्वर ने शूट किया है। आरुषि इससे पहले भुज, चेहरे और बच्चन पांडे जैसी फिल्मों में बिनोद प्रधान और असीम बजाज जैसे देश के दिग्गज सिनेमैटोग्राफर्स को असिस्ट कर चुकी हैं। यह आरुषि की बतौर सिनेमैटोग्राफर यह दूसरी इंडिपेंडेंट फीचर फिल्म है। आरुषि भोपाल की हैं और उन्होंने यहां के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एंव संचार विश्वविद्याल से पढ़ाई की है। आरुषि ने बाताया पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान फोटोग्राफी की ओर बढ़ गया था, इसके बाद उन्होंने इसे ही अपने करियर को चुनना बेहतर समझा। कॉलेज खत्म होते ही उन्होंने मुंबई की तरफ रुख कर लिया और कभी फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आरुषि का कहना है कि अभी मेरे सफर की शुरुआत हुई है और मुझे अभी कई नए डायरेक्टर्स के साथ काम करना है। क्रिएटिव स्टोरीज में अपने एक्सपेरिमेंट्स और नए इनपुट देने हैं। साथ ही अभी बहुत सीखना और काम करना है। फिलहाल अभी मेरा पूरा ध्यान मेरी मां कर्मा पर है। क्योंकि जिस तरह मां के लिए उसका बच्चा होता है, उसी प्रकार फिल्म मेरी मां कर्मा मेरे लिए है। क्योंकि मैं इस फिल्म की राइटिंग से लेकर पोस्ट प्रोडक्शन और प्रमोशन तक में शामिल हूं। उम्मीद है दर्शकों ने जिस प्रकार मेरी फिल्म ले चलहुं अपनी दुवारी को अपना प्यार दिया था, उसी प्रकार मेरी मां कर्मा को भी देंगे।
