उज्जैन गरोठ मार्ग पर बने गड्ढे अस्थाई तालाब की गहराई नहीं नाप पाए नाबालिक हुई मौत
उज्जैन के गरोठ मार्ग पर बने अस्थायी तालाब में डूबने से दो नाबालिगों की मौत हो गई। बच्चे घर से घूमने की बात कह कर निकले थे, जब देर शाम तक घर नहीं पहुंचे तो परिजन उनकी तलाश में निकले थे।

गुरुवार रात कालियादेह गांव में कुछ ग्रामीण दो बच्चों को तलाश रहे थे। बच्चे घर से निकले तो घूमने के लिए थे, लेकिन जब उज्जैन गरोठ मार्ग पर इन्हें एक तालाब में पानी भरा हुआ दिखा तो दोनों अपने कपड़े मोबाइल और चप्पल तालाब के किनारे रखकर नहाने चले गए। बच्चों को तालाब की गहराई अंदाजा न होने के चलते अपनी जान गंवानी पड़ी। देर रात गांव के लोग जब तालाब तक पहुंचे तो उन्होंने बच्चों की चप्पल कपड़े और मोबाइल देखकर अंदाजा लगाया कि बच्चों के साथ कोई अनहोनी घटित हुई है, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को इस बारे में जानकारी दी गई और पुलिस ने रेस्क्यू कर दोनों बच्चों के शव तालाब से बाहर निकाल लिए है
सीएसपी सचिन परते ने बताया कि मृतक विनीत पिता जितेंद्र विश्वकर्मा (16) और गोपाल उर्फ राघव पिता मनोहर चौधरी (15) हैं। दोनों ही कालियादेह गांव के रहने वाले हैं। गांव के पास में उज्जैन- गरोठ मार्ग का निर्माण चल रहा है। मार्ग में मिट्टी की जरूरत के लिए पंचक्रोशी मार्ग पर एक तालाब की खुदाई की गई। जिसमें पानी भर जाने से इसमें नहाने के लिए विनीत और गोपाल शाम को घर से निकले थे। जब वे वापस नहीं लौटे तो परिजन और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। तालाब के किनारे मोबाइल और चप्पल रखी हुई थी। इससे आशंका हुई थी कि दोनों हादसे का शिकार हुए हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों की मदद से दोनों के शव बाहर निकाले व अस्पताल भिजवाए।
तहसीलदार को की गई थी शिकायत
सरपंच आजाद पटेल ने बताया कि ग्राम पंचायत ने खुदाई के लिए एनओसी नहीं दी थी और न ही अनुमति जारी की थी, बावजूद करीब 40 फीट गहराई तक खुदाई कर दी गई। पंचायत की तरफ से तहसीलदार को लिखित में भी शिकायत की गई थी, कि जिम्मेदार तय से अधिक गहराई तक खुदाई कर रहे हैं। हादसे की आशंका है। बावजूद कोई रोक- टोक नहीं हुई और अंततः हादसा हो ही गया।
