23000 पंचायतों के लिए 108 करोड रुपए का आवंटन?
भोपाल । मध्य प्रदेश की 23000 ग्राम पंचायतें आर्थिक रूप से दयनीय स्थिति से गुजर रही हैं। कई ग्राम पंचायत के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। ग्राम पंचायतों में ठेकेदारों से जो विकास कार्य पूर्व में कराए गए थे, उनके भुगतान नहीं हो पा रहे हैं। ठेकेदार कोई भी नया काम नहीं कर रहे हैं। जो नए सरपंच और पंच चुने गए हैं, वह उधार वसूल करने वालों की शिकायत सुन- सुनकर परेशान हैं। सरकार पंचायतों की मांग को लेकर असंवेदनशील है। नए सरपंच और पंच निर्वाचित होने के बाद मतदाताओं की नाराजगी का शिकार हो रहे हैं।
(केंद्र एवं राज्य से पंचायतों को नहीं मिल रहा अंशदान)
केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के 3050 करोड़ की राशि में से मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों को केवल 915 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 1906 करोड़ रुपए में से केवल 415 करोड रुपए आवंटित किये हैं। ग्राम पंचायतों को केंद्र एवं राज्य सरकार की राशि नहीं मिलने के कारण, कई महीनो से पंचायत कर्मियों को वेतन भी नहीं मिला। ठेकेदारों ने जो छोटे-मोटे काम किए थे, उनका भी भुगतान पंचायते नहीं कर पा रही हैं।
(राज्य सरकार से नहीं मिल रहा पैसा )
राज्य सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए पंचायतों के लिए कोई आवंटन ही नहीं किया। वित्त विभाग ने जरूर 200 करोड रुपए का प्रावधान किया था। यही राशि ग्राम पंचायतों को मिली है। ग्राम पंचायतों की वर्ष 2022-23 में 915 करोड़ रुपए की राशि शासन द्वारा आवंटित नहीं की गई है। जिसके कारण ग्राम पंचायतों की आर्थिक स्थिति के हाल बेहाल हैं।
2018-19 के वित्तीय वर्ष से लगातार पंचायतों को फंड देने में राज्य सरकार द्वारा कोताही बरती जा रही है। वर्ष 2018-19 में 784.12 करोड़ रुपए की राशि पंचायतों को दी जानी थी। वित्त विभाग ने 612.18 करोड़ का प्रावधान किया। पंचायतों को वास्तव में 551.53 करोड रुपए ही आवंटित किए।
2019-20 में भी लगभग यही स्थिति बनी रही। पंचायतों का आवंटन 702.43 करोड़ का था। वित्त विभाग ने आवंटन 690.99 करोड़ का किया। पंचायतों को 552.80 करोड रुपए का आवंटन हुआ। वित्त विभाग ने 231 करोड रुपए रोक लिए।
2020-21 मे पंचायतों का आवंटन 886.15 करोड़ का था। वित्त विभाग ने 199.99 करोड़ रुपए का आवंटन किया. इतनी ही राशि पंचायतों को भेजी गई। 2020-21 के वित्तीय वर्ष में 502 करोड रुपए शासन ने पंचायतों को नहीं दिए।
वर्ष 2021-22 में भी यही स्थिति पुनः दोहराई गई, शासन द्वारा 1115.73 करोड़ का आवंटन किया गया। वित्त विभाग ने 699.99 करोड़ का आवंटन किया। इस साल भी पंचायतों के 186 करोड़ रुपए रोक लिए गए।
वर्ष 2022-23 का वित्तीय वर्ष खत्म हो गया है, मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायतों को केवल 200 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं। 2022-23 के वित्तीय वर्ष में 915.73 करोड़ रुपए सरकार ने रोक लिए।
(सरकार नहीं सुन रही है पंचायतों की )
पिछले 5 वर्षों से, सरकार लगातार पंचायतों की आवंटित राशि का भुगतान नहीं कर रही है। पिछले 5 वर्षों में पंचायतों के 2018 करोड रुपए सरकार ने रोक रखे हैं, जिसके कारण पंचायतों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है।
(दिवालिया होने की स्थिति में ग्राम पंचायतें )
ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि और राज्य सरकार से मिलने वाली राशि नहीं मिलने से पंचायतों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है। सड़के खराब हैं, पंचायत एरिया में विभिन्न वार्डों में सफाई नहीं हो पा रही है। कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं हो रहे है। ठेकेदारों ने जो काम किए हुए हैं, उनके भुगतान नहीं होने से, वह आगे कोई काम नहीं कर रहे हैं। पंचायतों में कोई भी नया काम नहीं हो पा रहा है. पुराने भुगतान नहीं होने से दिवालिया होने जैसी स्थिति, पंचायतों की हो गई है।
(स्टांप ड्यूटी और खनन से प्राप्त राजस्व नहीं मिला पंचायतों को)
मध्य प्रदेश सरकार स्टांप ड्यूटी के रूप में पंचायतों के लिए स्टांप ड्यूटी वसूल करती है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में सरकार को 1115 करोड़ रुपए की राशि स्टांप ड्यूटी से मिली थी, जिसमें से सरकार ने केवल 322 करोड़ रुपए ही पंचायतों को आवंटित किए हैं। इसमें से 150 करोड़ रुपए वेतन और मानदेय पर खर्च हो जाएंगे। 64 करोड़ रुपए की राशि वित्त विभाग ने रोक ली है, इसके बाद विभाग के पास केवल 108 करोड़ रुपए बचे हैं। 23000 पंचायतों को 108 करोड़ रुपए किस तरह से आवंटित किए जाएं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और विभागीय मंत्री जी इस पहेली का हल नहीं खोज पा रहे हैं।
(सुनियोजित रूप से पंचायतों की राशि रोकी? )
केंद्र एवं राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक सहायता नहीं दी। स्टांप ड्यूटी और खनन इत्यादि से होने वाली आय को भी राज्य सरकार ने पंचायतों को नहीं दी। राज्य सरकार की भी आर्थिक स्थिति दयनीय है। राज्य सरकार को बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है, जिसके कारण पंचायतों की राशि को भी राज्य सरकार ने रोक रखा है। केंद्र एवं राज्य सरकार ग्राम पंचायतों को स्वयं की कर प्रणाली से आत्म निर्भर बनाने की दिशा में सुनियोजित रणनीति के तहत काम कर रही हैं। ग्राम पंचायतों के पिछले 5 वर्षों में राज्य सरकार ने 2018 करोड रुपए रोककर, पंचायतों को आर्थिक रूप से कंगाल बना दिया है। पिछले कई महीने से भोपाल जिले में कर वसूली को लेकर भारी कवायद जिला पंचायत स्तर पर की जा रही थी, भोपाल जिले की ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर की वसूली भी हुई. भोपाल जिले का मॉडल 23000 पंचायतों में लागू करने की तैयारी सरकार ने कर ली थी। संपत्ति कर, जलकर एवं अन्य करों के माध्यम से ग्राम पंचायतें स्वयं को आत्मनिर्भर बनाएं. इसके लिए अधिसूचना भी जारी हो गई थी,किंतु विधानसभा चुनाव कुछ महीने बाद होने के कारण सरकार को अपने कदम पीछे हटाने पड़े।
(ग्रामीण क्षेत्रों में 3 करोड़ 50 लाख मतदाता)
ग्राम पंचायत क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 3 करोड़ 50 लाख के आसपास है। मध्य प्रदेश के 52 जिलों के शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 70 लाख है। ग्रामीण अंचलों के मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने के कारण सरकार ने ताबड़ – तोड़ मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर ग्राम पंचायतों की अनिवार्य कर वसूली की अधिसूचना को अपर्याप्त मानते हुए खारिज किया। पिछले 5 वर्षों में ग्राम पंचायतों की जो आर्थिक बदहाली है, उससे सरकार किस तरह से चुनाव के समय अपना बचाव करेगी,यह सरकार को सोचना होगा।
