नई दिल्ली । बजरंग दल विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि कर्नाटक चुनाव से संबंधित उनकी पार्टी के घोषणा-पत्र में यह कतई नहीं कहा गया है कि राज्य में उनकी पार्टी की सरकार बनने की स्थिति में संगठन (बजरंग दल) पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा, लेकिन नफरत फैलाने वाले सभी संगठनों के खिलाफ कानून के दायरे में ‘निर्णायक कार्रवाई’ किए जाने का वादा जरूर किया है। चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा की जा रही आलोचनाओं को लेकर उस पर पलटवार करते हुए बजरंग दल की तुलना ‘बजरंगबली’ से किए जाने पर सवाल भी उठाकर पूछा कि इस ‘जादुई परिवर्तन’ की व्याख्या कैसे की जा सकती है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य के लोग बुद्धिमानी से अपने प्रतिनिधि का चयन करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों का चयन तय करेगा कि कर्नाटक एक उदार, लोकतांत्रिक, बहुलवादी, सहिष्णु और प्रगतिवादी मॉडल बनेगा या फिर अंतर्मुखी, बहुसंख्यकवादी, असहिष्णु और दमनकारी राज्य।
कांग्रेस नेता ने कहा ‘लोकतंत्र और कर्नाटक के भविष्य के लिए, हमें भाजपा को कर्नाटक में जीतने और इस जीत को पड़ोसी राज्यों में भुनाने से रोकना चाहिए। राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कार्यान्वयन और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के भाजपा के वादे के बारे में पूछने पर, चिंदबरम ने कहा कि दोनों वे मुद्दे हैं, जो समाज को विभाजित करने और सामाजिक संघर्ष को बढ़ावा देने की क्षमता रखते हैं। चिदंबरम ने कहा ‘कुछ उत्तरी और पूर्वोत्तर राज्यों में जो कुछ हुआ है, उसका हमें अनुभव है।
