नई दिल्ली । गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फावेट आईएनसी के लिए इस हफ्ते की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। कंपनी के शेयर में सोमवार को लगभग 4 परसेंट तक की गिरावट दर्ज की गई और ये अभी भी जारी है। अल्फाबेट के शेयर में गिरावट की शुरुआत एक खबर से हुई थी। रिपोर्ट आई थी कि सैमसंग अपने फोन्स से गूगल को डिफॉल्ट सर्च इंजन से रिमूव कर सकता है। सैमसंग के फोन में फिलहाल डिफॉल्ट सर्च इंजन गूगल है, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो ब्रांड इसे माईक्रोसाफ्ट बिंग से रिप्लेस कर सकता है। इस खबर के आने के बाद गूगल की पैरेंट कंपनी के शेयर में गिरावट आई है। मगर सैमसंग के लिए ऐसा कर पाना आसान नहीं होगा। कम से कम अमेरिकी मार्केट में तो ऐसा ही है। ट्वीटर पर एंड्रियास ने इस दावे को लेकर एक पॉइंट उठाया। उनके मुताबिक सभी एंड्रॉयड ओईएमएस को मोबाइल ऐप्लिकेशन डिस्ट्रिब्यूशन एग्रीमेंट साइन करना होता है।
अगर कोई मोबाइल मैन्युफैक्चर्र अपने फोन में गूगल प्ले स्टोर और दूसरे गूगल एप्स चाहता है, तो उन्हें ये एग्रीमेंट साइन करना होगा। इस एग्रीमेंट के तहत एंड्रॉयड स्मार्टफोन मेकर्स को गूगल सर्च को डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाना होगा। ऐसे में अगर सैमसंग गूगल प्ले स्टोर अपने फोन्स में चाहती है, तो उसे गूगल को डिफॉल्ट सर्च इंजन रखना होगा। वो माइक्रोसॉफ्ट बिंग पर स्विच नहीं कर सकती है। इस कहानी में ट्विस्ट इसलिए आया क्योंकि एमएडीए रूल हर जगह लागू नहीं होता है। यूरोप ने साल 2018 में गूगल पर 5 अरब डॉलर का एंटी-ट्रस्ट फाइन लगाया। ऐसे में यूरोप में कंपनी गूगल ऐप्स और प्ले स्टोर के साथ गूगल सर्च और क्रोम को डिफॉल्ट सर्च इंजन और ब्राउजर बनाने के लिए फोर्स नहीं कर सकती है। ऐसा ही कुछ भारत में भी होता दिख रहा है। भारत ने भी गूगल पर कंपटीशन खत्म करने को लेकर फाइन लगाया था। इतना ही नहीं भारत में भी यूरोप की तरह ही गूगल नया एग्रीमेंट ला रहा है। इसके तहत किसी भी एंड्रॉयड फोन में सिर्फ गूगल प्ले स्टोर प्री-इंस्टॉल्ड रहेगा। इसके अलावा यूजर्स के पास डिफॉल्ट ब्राउजर चुनने की आजादी होगी।
ऐसे में अगर सैमसंग अपने फोन्स में बिंग को डिफॉल्ट सर्च ब्राउजर दुनियाभर में नहीं बना सकती है। इसके बाद भी गूगल के लिए रिस्क बना हुआ है। ऐसे देश जहां एमएडए गूगल के वर्जन से अलग है। वहां कंपनी को डिफॉल्ट सर्च इंजन गूगल को बनाए रखने के लिए स्मार्टफोन कंपनियों को पैसे देने होंगे।
