पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने करुणानिधि को यह संदेश देने के लिए अपने दूत भेजे थेl
नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि इंदिरा गांधी ने डीएमके से आपातकाल का विरोध नहीं करने के लिए निवेदन किया था। लेकिन उस समय के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने उनकी बात नहीं मानी थी। इसी वजह से एम करुणानिधि की सरकार बाद में गिर गई थी।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने करुणानिधि को यह संदेश देने के लिए अपने दूत भेजे थे, कि उन्हें 1975 में लागू आपातकाल का विरोध नहीं करना चाहिए और यदि उन्होंने इस अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया तो द्रमुक सरकार को बर्खास्त किया जा सकता है।
श्री स्टालिन ने कहा, कि इंदिरा गांधी ने खुद को संकट से बचाने के लिए देश में आपातकाल लगाया था। जिसके बाद तमाम नेताओं के खिलाफ कठोर आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत मामले दर्ज किए गए। तब तमिलनाडु में हमारी सरकार थी। उस समय इंदिरा गांधी ने दूतों के माध्यम से कलैगनार (करुणानिधि) को सूचित किया कि आपको आपातकाल का विरोध नहीं करना चाहिए और यदि विरोध किया तो, द्रमुक सरकार एक सेकंड में गिर जाएगी। हालांकि, करुणानिधि ने उनसे कहा कि उन्हें अपनी जान की भी परवाह नहीं है और लोकतंत्र उनके लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने आगे कहा कि करुणानिधि ने आपातकाल के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया, जिसके तुरंत बाद द्रमुक सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।
जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आने वाले चुनावों में सभी 40 सीटों (तमिलनाडु की 39 और पुडुचेरी की एक सीट) को जीतने के लिए कड़ी मेहनत करने का आग्रह किया। लोगों ने हाल में इरोड पूर्वी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में गठबंधन सहयोगी-कांग्रेस को शानदार जीत देकर एसपीए को स्पष्ट जनादेश दिया है। श्री स्टालिन की इस जनसभा के दौरान अन्नाद्रमुक और डीएमडीके सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के 4,000 से अधिक लोग द्रमुक में शामिल हुए।
