काम करने वाली महिलाओं को आसानी से नहीं मिलते हैं मकान
नई दिल्ली। भारत में 10 करोड़ सिंगल महिलाएं हैं। जो अपने नौकरी और अपने कामकाज के लिए अकेली रहती हैं। 2001 की जनगणना में भारत में 5। 12 करोड़ महिलाएं अकेली रहती थी। 2011 की जनगणना में यह संख्या बढ़कर 7.14 करोड़ हो गई थी। बीबीसी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब 10 करोड़ सिंगल महिलाएं हैं जो अपनी मर्जी से अकेली रह रही हैं।
भारत में अकेली रहने वाली महिलाओं को बड़ी मुश्किल से घर मिलते हैं। जो मकान मालिक घर किराए पर देते हैं। वह महिला किराएदार के ऊपर तरह तरह की बंदिश लगाते हैं। सबसे ज्यादा खराब हालत दिल्ली बेंगलूर हैदराबाद जैसे शहरों की है। जहां पर मकान मालिक कई तरह की नियम और शर्तें लागू करते हैं। अकेली महिलाओं को किराया भी ज्यादा देना पड़ता है। वह भी सुरक्षा के नाम पर।
पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षित महिलाएं नौकरी के लिए बड़े शहरों का रुख करती हैं। उन्हें हर क्षेत्र में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। भारत में उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पहले की तुलना में काफी तेजी के साथ बढ़ी है। सिंगल रहते हुए महिलाओं में काम करने की इच्छा बढ़ी है। भारत में अभी भी 20 फ़ीसदी महिलाएं ही कामकाजी महिलाओं के रूप में पहचानी गई हैं। जबकि चीन में 62 फ़ीसदी और अमेरिका में 55 फ़ीसदी महिलाएं काम करती हैं।
अकेली महिलाओं को मकान किराए पर देने से लोगों को डर रहता है। कुछ ऊंचा नीचा होने पर मकान मालिक को अनावश्यक रूप से जवाबदेह होना पड़ेगा। जिसके कारण महिलाओं को आसानी से मकान नहीं मिलते हैं।
