वैश्विक रुझान और विदेशी कोषों की गतिविधियां भी बाजार को दिशा देंगी
नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ब्याज दरों पर फैसले से इस सप्ताह मुख्य रूप से स्थानीय शेयर बाजारों की दिशा तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। उनका कहना है कि इसके अलावा वैश्विक रुझान और विदेशी कोषों की गतिविधियां भी बाजार को दिशा देंगी। बाजार निवेशकों की नजरें सप्ताह के दौरान राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी रहेगी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक संकेतों की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि बाजार भागीदारों की नजर घरेलू संकेतकों जैसे रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों तथा गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर भी रहेगी। विधानसभा चुनावों के नतीजे आठ दिसंबर को आएंगे। उन्होंने कहा कि वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका में बॉन्ड पर प्रतिफल और डॉलर इंडेक्स में गिरावट आई है और आगे बाजार की इस पर भी नजर होगी। वृहद आर्थिक मोर्चे पर सोमवार को सेवा क्षेत्र के लिए खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई)के आंकड़े आएंगे।
बाजार के जानकारों का कहना है कि इस सप्ताह शेयर बाजारों के लिए सबसे बड़ा घटनाक्रम रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा है। बाजार के लिए आगे दो प्रमुख घटनाक्रम रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा और दिसंबर के मध्य में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक है। इनसे तय होगा कि निकट भविष्य में निवेशकों का मूड कैसा रहने वाला है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही ब्रेंट कच्चे तेल के दाम और रुपए का उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। ऊंचे मूल्यांकन फेडरल रिजर्व की बैठक और चीन में कोविड अंकुशों की वजह से आगामी सप्ताहों में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहेगा।
