भोले की भक्ति भोलेपन से होती है – पद्मश्री कैलाश खैर
इंदौर। मंगलवार को उज्जैन में भगवान महाकाल मंदिर परिक्षेत्र में नवनिर्मित महाकाल लोक का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों होने जा रहा है। देश के अध्यात्म इतिहास में यह प्रसंग अभूतपूर्व है, स्वर्णिम अध्याय भी है। करोड़ों देशवासियों की आस्था का केंद्र माने जाने वाले अवंतिकाधीश के नवश्रंगारित महाकाल लोक की भव्यता और दिव्यता का दर्शन देशवासी मीडिया के जरिए कर चुके है। विधिवत लोकापर्ण प्रधानमंत्री जी के हाथों होने के बाद आम श्रध्दालु इस अदभूत लोक की सैर कर सकेंगे।
बहरहाल महाकाल लोक के लोकार्पण के साथ एक दिव्य प्रसंग और जुड़ने जा रहा है। यह है भगवान महाकाल की स्तुतिगान, यह स्तुति पद्मश्री कैलाश खैर जी द्वारा गाई गई है। प्रधानमंत्री जी के सामने कैलाश जी इसे प्रस्तुत करेंगे और इसी के साथ स्तुति की लांचिंग हो जाएंगी। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहली बार भगवान महाकाल की स्तुति तैयार हुई है। कैलाश जी सोमवार को इसी सिलसिले में इंदौर आए थे और इस दौरान वे इंदौर प्रेस क्लब भी पधारे। भगवान शिव में अटूट आस्था रखने वाले कैलाश खैर जी ने इस मौके पर मीडिया के साथियों के बीच मन चित्त की बाते खुल कर की।
अहम से नही होती भक्ति :
वे कहते है कि शिव की भक्ति भोले बन कर निश्चिल भाव से ही होती है।
जैसे मां बाप अपने बच्चे को मनाते है, वैसे ही भगवान महाकाल की मुझ पर असीम कृपा है, इसका यह मतलब यह नहीं कि मुझे इस बात का अहम है, मन में अहम आ जाए तो फिर भोले की भक्ति नहीं हो सकती इसे तो भोले मन से ही पूजना होता है।
अद्भूत इवेंट होने वाला है उज्जैन में :
उज्जैन में होने वाला इवेंट सबसे अद्भूत होने वाला है। सप्तऋषियों द्वारा स्थापित नगरियों में एक है उज्जैन, काशी की तरह ही भगवान भोलेनाथ ने इसे श्रंगारित किया है। समय की गणना ही हमारे उज्जैन से शुरू हुई है लिहाजा यही नगर देश के मध्य में स्थापित है। कण कण शंकर है मालवा भूमि का, इसीलिए तो इंदौर की देवी अहिल्या शिव को साक्षी मान कर राज करती थी मतलब स्पष्ट है कि शिव ही आदि है शिव ही अनंत है।
अवधूत है प्रधानमंत्री मोदी :
भारत की असली चेतना अध्यात्म है और अध्यात्म के दम पर ही हम विश्व के तमाम देशों से आगे निकल रहे है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जाता है, जो देश के पीएम ही नहीं बल्कि एक अवधूत है। देश के मंदिरों, अध्यात्म स्थलों, संस्कृति केंद्रों और धर्म के उत्थान के लिए काम करने वाला व्यक्ति अवधूत ही होता है। अध्यात्म से ही देश की चेतना जाग्रत होगी और भारत देश ही विश्व को शांति, अहिंसा और संस्कारों का पाठ पढ़ाएंगा।
