इंदौर । इंदौर- उज्जैन फोरलेन फास्टट्रैक सिस्टम में एक नई गड़बड़ी सामने आई है। इस टोल टैक्स से गुजरने वालों को दो बार टोल टैक्स चुकाना पड़ रहा है। अमूमन वाहन चालक इस पर ध्यान नहीं देते हैं। फास्ट ट्रैक से शुल्क कट जाता है।
हाल ही में बरौली टोल नाके और निनोरा टोल नाके पर दो बार फास्टट्रैक से टोल टैक्स कट गया।इसकी शिकायत करने पर एक नई बात सामने आई है।
इंदौर-उज्जैन फोरलेन बनाने वाली कंपनी महाकालेश्वर टोलवेज प्राइवेट लिमिटेड का टोल ठेका जनवरी 2022 मैं स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद सड़क विकास निगम लिमिटेड की सहायक कंपनी पीसीएस द्वारा टोल संचालन का काम किया जा रहा है।
फास्ट ट्रैक सिस्टम की देखरेख उन्हीं की कंपनी के द्वारा की जा रही है। बारा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को 3 महीने का भुगतान नहीं किए जाने की वजह से उसने फास्ट ट्रैक सिस्टम की देखरेख ही नहीं की।
एमपीआरडीसी के बैंक खाते में टोल टैक्स की राशि नहीं आई।
फास्ट ट्रैक सिस्टम में दो बार टोल टैक्स कट रहा है लेकिन वह राशि एमपीआरडीसी के बैंक खाते में नहीं पहुंची। अब यह कहा जा रहा है कि जिन का 2 बार टोल कटा है। उनकी राशि लौटाई जा रही है। जब एमपीआरडीसी के बैंक खाते में यह राशि जमा ही नहीं हुई ल,तो यह राशि किस तरह वापस लौटाई जा रही है। इसको लेकर एक नई शंका सामने आई है। कोई एक खाता अलग है। जिसमें टोल टैक्स की राशि जमा हो रही है। करोड़ों रुपया रोज टोल टैक्स फास्ट्रेक के जरिए जमा होता है।अतः इसकी जांच कराना जरूरी हो गया है। फास्ट ट्रैक के नाम पर कोई बड़ा घपला घोटाला तो सुनियोजित रूप से नहीं हो रहा है।
