नारी सम्मान ही नारायण की पूजा है -: संत रामनारायण जी महाराज
प्रजापति समाज थांदला में भागवत कथा के दौरान माना कृष्ण जन्मोत्सव।
*थांदला से (विवेक व्यास, माधव एक्स)* थांदला: मानव मात्र के लिए नारी का स्वरूप स्वय भगवान का रूप है,इस पृथ्वी पर हीरे के समान मनुष्य जैसे जीवन को मात्र शक्ति के द्वारा ही लाया जाता है। मां, बहन बेटी सास ,या किसी भी रूप में नारी के संबंध में बंधे हो नारी शक्ति को तनिक मात्र भी दुख पहुंचाना या उनकी आखों में आसू का कारण बनना, घोर नरक का कारण बनता है। उपरोक्त कल्याण कारी प्रवचन प्रजापति समाज द्वारा प्रजापति भवन थांदला में पूज्य मन्नत 108 श्री रामनारायण जी महाराज के मुखारविंद से भागवत कथा के चौथे दिन उद्बोधित किए गए ।
कथा के प्रसंग में कृष्ण प्राकट्य(जन्मोत्सव)मनाया गया। सम्पूर्ण कथा स्थल आनंद और उत्साह से भर गया नृत्य और जयकारों से पूरा सदन गूंज उठा फुलो की बरसात के साथ सभी स्रोत गण झूम उठे।कथा में थांदला प्रजापत समाज जन, नगर के लोगो के अतिरिक्त बड़ी संख्या में राजगढ़, धुलेट, पेटलावद , पारा, खवासा ,राजस्थान से भक्त जनों ने शिरकत की।
