ब्लॉकेज खुलने के बाद घुल जाएगा स्टेंट
चंडीगढ़ । पीजीआई चंडीगढ़ के एडवांस कार्डियक सेंटर ने रोबोट की सहायता से पहला बायरोसोब्रेबल स्टेंट इम्प्लांट किया है। पीजीआई के इस सेंटर ने 45 साल के मरीज की कोरोनरी आर्टरी में 90 फ़ीसदी ब्लॉकेज था।
कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर यशपाल शर्मा ने अपनी टीम की मदद से रोबोट की सहायता से स्टैंट को सफलतापूर्वक इन प्लांट किया।
मरीज मैं स्टैंट का सफल इम्प्लांट का कार्डियककैथ लैब के कोरिड्स रोबोटिक आर्म के जरिए हुआ है। इस तकनीक की विशेषता है, कि यह स्टैंट अपना काम करने के बाद जैसे ही आर्टिस के ब्लॉक खुलते हैं। उसके बाद यह शरीर में घुल जाता है।
पीजीआई चंडीगढ़ का कार्डियक सेंटर देश का पहला केंद्र बन गया है। जहां रोबोट की मदद से इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
बायोरेसोब्रेबल स्टैंट एक ट्यूब जैसी डिवाइस होती है। जिसे ब्लॉकेज होने पर आर्टरी में लगाया जाता है। हार्ट को पूरी तरह खून की सप्लाई मिलती रहे। रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से स्टैंट को आर्टरी के उस हिस्से में लगाया जाता है। जहां कोलेस्ट्रॉल जमने से ब्लड सप्लाई नहीं हो पाती है। और हार्ट अटैक का खतरा होता है। हार्ट में ब्लॉकेज का यह सबसे सुरक्षित इस इम्प्लांट करने में पीजीआई चंडीगढ़ सफल रहा।
