महाकाल मंदिर समिति द्वारा सोला पहनने की अनिवार्यता मै परिवर्तन करने के विचार का मंगेश श्रीवास्तव ने समर्थन किया एवं फैसले को स्वागत योग्य बताया
उज्ज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोला पहनने के नियम में परिवर्तन करने के महाकाल मंदिर समिति के विचार का इंदिरा नगर वार्ड 5 के अध्यक्ष मंगेश श्रीवास्तव ने समर्थन किया है। मंगेश श्रीवास्तव ने कहा कि महाकाल मंदिर में श्रध्दालुओं के जींस पेंट, चड्डे आदि आपत्तिजनक वस्त्र पहनकर आने पर भी रोक लगे। उज्जैन धार्मिक नगरी है, इसमें सभी देवी देवताओं का निवास है जिस पर उज्जैन के प्रमुख मंदिर माता हरसिध्दि, चिंतामण गणेश, मां गढ़कालिका, काल भैरव महाराज, मंगलनाथ मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों पर भी जींस, चड्डा एवं बरमुंडा पर मंदिर के गर्भगृह में जाने पर ऐसे श्रध्दालु जो कपड़े पहनकर आते हैं उनपर भी रोक लगे। साथ ही हम श्रध्दालुओं को सुविधा देते देते कहीं हम अपनी संस्कृति को न ताक में रख दें। अभी गर्भगृह में प्रवेश बंद के दौरान १५०० की रसीद पर गर्भगृह में जाने वाले श्रद्धालुओं को ड्रेस कोड का पालन करना होता है। मंदिर समिति अब त्रिकाल पूजन और आरती के दौरान ही सोला अनिवार्य करने और अन्य समय बिना सोला धारण करे गर्भगृह में प्रवेश देने पर विचार कर रही है।
मंगेश श्रीवास्तव ने बताया कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्भगृह में जाकर पूजन, दर्शन करने के लिए मंदिर समिति द्वारा तय नियमों के तहत १५०० की रसीद वाले दो श्रद्धालुओं को जिसमें पुरूष के लिए सोला और महिला के लिए साड़ी, ब्लाउज ड्रेस कोड में ही प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में अब मंदिर समिति विचार कर रही है कि सोला धारण करने का नियम भगवान की तीन समय होने वाली त्रिकाल पूजन और आरती के दौरान ही रहे। इसके अलावा अन्य समय में टिकट लेकर गर्भगृह में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सोला पहनने की अनिवार्यता नही रहे। इसके पीछे उद्देश्य है कि देश भर से आने वाले कई श्रद्धालुओं को सोला पहनने की अनिवार्यता के कारण गर्भगृह में जाकर दर्शन लाभ नही हो पाते है। बाहर के श्रद्धालु जानकारी नही होने से अपने साथ सोला या महिला श्रद्धालु के पास साड़ी ब्लाउज उपलब्ध नही होता है।
सामान्य जन के गर्भगृह में जाने के दौरान कोई नियम नही
मंगेश श्रीवास्तव के अनुसार मंदिर समिति का तर्क यह भी है कि सामान्य दिनों में जब भीड़ का दबाव कम होता है, उस दौरान सामान्य श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है। उस समय सभी श्रद्धालु धारण किए हुए कपड़ों के साथ ही गर्भगृह में दर्शन को जाते है। यदि यह व्यवस्था है तो फिर पूजन और आरती के समय को छोड़कर १५ सौ की रसीद पर श्रद्धालु़ओं को बिना सोला पहने अन्य कपड़ों में भी प्रवेश दिया जा सकता है।
अभी यह है नियम
मंगेश श्रीवास्तव ने बताया कि मंदिर समिति द्वारा गर्भगृह में जाने वाले दो श्रद्धालुओं को १५ सौ की रसीद पर प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए पुरूष को सोला और महिला के लिए साड़ी, ब्लाउज पहने होने पर ही प्रवेश देने की पात्रता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को केवल सीमित मात्रा में जल चढ़़ाने की अनुमति होती है।
सोला व साड़ी की स्वच्छता पर भी संदेह
मंगेश श्रीवास्तव के अनुसार मंदिर के गर्भगृह में जाने वाले श्रद्धालु जो अपने साथ सोला और साड़ी नही लाते है, वे श्रद्धालु मंदिर के बाहर से ही किराए पर सोला और साड़ी, ब्लाउज लेते है। खास बात यह है कि बाहर से लिए जाने वाले कपड़ों की स्वच्छता को लेकर भी संदेह बना रहता है। मंदिर के बाहर मिलने वाले सोला व साड़ी का उपयोग बिना धुलाई करे कई श्रद्धालुओं को देकर क रते है। इससे श्रद्धालु की पवित्रता भी नही रह पाती है। वहीं किराए के रूप में भी अधिक राशि वसुलते है।
सोला की अनिवार्यता हटाने पर विचार कर रहे है
मंगेश श्रीवास्तव ने बताया कि महाकाल मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु देश भर से दर्शन के लिए आते है। श्रद्धालु गर्भगृह में जाना चाहते है, लेकिन सोला और साड़ी पहनने की अनिवार्यता होने से वंचित रह जाते है। जबकि सामान्य दर्शनार्थियों को प्रवेश देने के दौरान यह नियम लागू नही होता है। महाकाल मंदिर समिति द्वारा विचार किया जा रहा है कि मंदिर में तीन समय की त्रिकाल पूजन और आरती के दौरान गर्भगृह में जाने वालों के लिए सोला पहनने का नियम अनिवार्य रहेगा। वहीं अन्य समय में जाने वालों के लिए सोला पहनने की अनिवार्यता समाप्त की जाए। मंगेश श्रीवास्तव ने बताया कि इसी प्रकार मंदिर में जींस पेंट, चड्डे आदि आपत्तिजनक वस्त्रों को पहनकर जाने पर भी रोक लगाई जाए।
