प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
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जगदलपुर 05 फरवरी 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वित्तीय वर्ष के अंत में बजट खपाने की आपाधापी यानी श्मार्च रशश् को रोकने के लिए एक सख्त और अहम फैसला लिया है। वित्त विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार प्रदेश में 15 फरवरी, 2026 के बाद वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधानों से किसी भी प्रकार की नई सामग्री की खरीदी या क्रय आदेश जारी करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। वित्त विभाग के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखना है।
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि अक्सर यह देखा गया है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में विभिन्न विभाग केवल बजट को व्यपगत होने से बचाने के लिए जल्दबाजी में ऐसी सामग्रियों की भी खरीदी कर लेते हैं, जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं होती। इस प्रवृत्ति से शासन की राशि अनावश्यक रूप से अवरुद्ध हो जाती है, जिसे वित्त विभाग ने शासन के हित में अनुचित माना है। नए नियमों के तहत विभागों को न केवल 15 फरवरी के बाद नए ऑर्डर देने से रोका गया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि 15 फरवरी तक जारी किए गए सभी ऑर्डर्स का भुगतान हर हाल में 15 मार्च, 2026 तक पूरा कर लिया जाए। हालांकि, जनहित और आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण मदों को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा है। जेलों, सरकारी अस्पतालों, छात्रावासों और आश्रमों में भोजन, कपड़े और दवाइयों जैसी बुनियादी जरूरतों की खरीदी निर्बाध रूप से जारी रहेगी। इसी प्रकार, आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण आहार और उसके परिवहन पर कोई रोक नहीं होगी। केंद्र सरकार की योजनाओं, विदेशी सहायता प्राप्त परियोजनाओं, नाबार्ड और सिडबी पोषित कार्यों के लिए भी छूट दी गई है। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और वन विभाग जैसी निर्माण एजेंसियों को चल रही परियोजनाओं के लिए आगामी एक महीने की जरूरत के हिसाब से सामग्री खरीदने की अनुमति होगी। पेट्रोल, डीजल, वाहन मरम्मत और 5,000 रुपये तक के छोटे आकस्मिक व्यय भी इस दायरे से बाहर रहेंगे।
प्रशासनिक स्तर पर कड़ाई बरतते हुए विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 फरवरी के बाद खरीदी के लिए अधिकारियों को प्राप्त वित्तीय अधिकार भी इस आदेश के प्रभाव से स्थगित माने जाएंगे और यदि किसी विशेष परिस्थिति में खरीदी अत्यंत आवश्यक हो, तो इसके लिए वित्त विभाग से विशेष अनुमति लेनी होगी। यह प्रतिबंध विधानसभा सचिवालय, राजभवन, मुख्यमंत्री निवास व सचिवालय तथा उच्च न्यायालय व अधीनस्थ न्यायालयों पर लागू नहीं होगा।
