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डॉ. राघव नाथ झा
माधव एक्सप्रेस/उज्जैन महाकाल की पावन नगरी उज्जयिनी में माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधान संस्थान (पंजी.), इंदौर द्वारा आयोजित 40वें अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष, वास्तु एवं आयुर्वेद महाकुंभ में ज्योतिर्वेद विज्ञान, पटना के उपनिदेशक, इंटरनेशनल बिजनेस स्टार्टअप एंड एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IBSEA) के हेरिटेज एंड कल्चर एलायंस के अध्यक्ष, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के शोधकर्ता, स्वतंत्र पत्रकार तथा कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. राघव नाथ झा ने “भारतीय ज्योतिष, वास्तु एवं आयुर्वेद : परंपरा, प्रतिष्ठा और भविष्य” विषय पर ओजस्वी एवं विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने उद्बोधन में डॉ. झा ने कहा कि भारतीय ज्योतिष केवल जन्मकुंडली अथवा व्यक्तिगत भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, जलवायु, पर्यावरण, कालगणना, राष्ट्र निर्माण और मानव कल्याण का प्रमाणिक एवं व्यापक विज्ञान है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ज्योतिष को केवल जातक-केंद्रित दृष्टिकोण से निकालकर शोध, विज्ञान और समाजोपयोगी दृष्टि से स्थापित करने की है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) मौसम एवं जलवायु पर वैज्ञानिक अनुसंधान करता है, उसी प्रकार भारतीय ज्योतिष, पंचांग, खगोल एवं पारंपरिक ज्ञान के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर ज्योतिष अनुसंधान संस्थान अथवा राष्ट्रीय ज्योतिष अनुसंधान परिषद की स्थापना की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने “विश्व ज्योतिष दिवस” घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार योग ने विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई है, उसी प्रकार भारतीय ज्योतिष को भी वैश्विक पहचान दिलाने की आवश्यकता है।
डॉ. झा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) गणना का कार्य कर सकती है, लेकिन ऋषियों की साधना, अनुभव और अंतर्दृष्टि का स्थान नहीं ले सकती। आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान-परंपरा के समन्वय से ही विश्व के समक्ष एक नया शोध मॉडल प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण पर भी विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न उपलब्ध अध्ययनों एवं उद्योग आकलनों के अनुसार भारत में ज्योतिष, वास्तु, पंचांग, आध्यात्मिक परामर्श एवं संबंधित सेवाओं का वार्षिक आर्थिक आकार लगभग ₹60,000 करोड़ तक पहुँच चुका है। यदि इस क्षेत्र में शोध, गुणवत्ता, मानकीकरण और वैश्विक विस्तार पर गंभीर पहल की जाए, तो यह विकसित भारत–2047 की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का एक सशक्त स्तंभ सिद्ध हो सकता है।
व्याख्यान के उपरांत डॉ. राघव नाथ झा को भारतीय ज्ञान-परंपरा, वैदिक ज्योतिष एवं सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए “इंडियन आइकन अवॉर्ड–2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के यशस्वी कुलपति प्रो. शिवशंकर मिश्र के करकमलों से प्रदान किया गया।
सम्मान प्राप्ति के पश्चात डॉ. झा ने माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधान संस्थान (पंजी.), इंदौर के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए विशेष रूप से संस्थान के प्रेरणास्रोत एवं आयोजन के प्रमुख आदरणीय पं. दिनेश गुरुजी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि पं. दिनेश गुरुजी वर्षों से भारतीय ज्योतिष, वास्तु एवं आयुर्वेद की गौरवशाली परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने तथा देशभर के विद्वानों को एक सूत्र में जोड़ने का अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने आयोजन संयोजक आदरणीय पं. योगेन्द्र महंत जी की दूरदर्शिता, उत्कृष्ट संगठन क्षमता एवं अथक परिश्रम की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व और समर्पित प्रयासों से यह महाकुंभ ज्ञान, शोध, संवाद और सांस्कृतिक समन्वय का एक भव्य अंतरराष्ट्रीय मंच बन सका। कार्यक्रम का अत्यंत गरिमामय, विद्वत्तापूर्ण एवं प्रभावशाली संचालन प्रख्यात विद्वान आदरणीय हीरेंद्र शुक्ला जी ने किया, जिनकी शास्त्रसम्मत प्रस्तुति, ओजस्वी वाणी एवं उत्कृष्ट मंच संचालन ने पूरे आयोजन को विशिष्ट गरिमा प्रदान की। डॉ. झा ने आचार्य राकेश पाण्डेय गुरुजी, आनंद शर्मा, गौतम ऋषि सहित आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियों, विद्वानों एवं सहयोगियों के प्रति भी अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया।
डॉ. झा ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि महाकाल का प्रसाद तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृत, ज्योतिष, वास्तु और सनातन संस्कृति की निष्ठापूर्वक सेवा का नया दायित्व है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि परंपरा, शोध और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से भारत पुनः विश्व को ज्ञान, संस्कृति और वैज्ञानिक चिंतन की नई दिशा प्रदान करेगा।
