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शिविर में हुई 150 दिव्यांग बच्चों की जांच, 45 बच्चों का होगा नि:शुल्क ऑपरेशन
उज्जैन, 21 जुलाई 2026। समय पर इलाज मिलने से कई दिव्यांग बच्चों की जिंदगी बदल सकती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण कई परिवार यह इलाज नहीं करा पाते। ऐसे बच्चों को राहत देने के उद्देश्य से रविवार को अंकितधाम सेवाधाम में निःशुल्क दिव्यांग परीक्षण शिविर लगाया गया। शिविर में करीब 150 बच्चों की जांच की गई। इनमें से 40 से 45 बच्चों का चयन नि:शुल्क ऑपरेशन के लिए किया गया। इनका ऑपरेशन यूनिक हॉस्पिटल में नीमा ट्रस्ट के माध्यम से कराया जाएगा।
शिविर के दौरान ऐसे बच्चों की भी जांच की गई, जो चलने-फिरने में असमर्थ थे। डॉक्टरों की टीम उनके बेड तक पहुंची और वहीं स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक चिकित्सकीय सलाह दी। चयनित बच्चों का ऑपरेशन यूनिक हॉस्पिटल में नीमा ट्रस्ट के माध्यम से पूरी तरह नि:शुल्क किया जाएगा।
ऑपरेशन के साथ दवाइयां, कैलिपर्स, प्लास्टर, फिजियोथेरेपी, भोजन और अस्पताल में रहने की व्यवस्था भी नि:शुल्क रहेगी। बच्चों के साथ आने वाले अभिभावकों के रहने और भोजन का खर्च भी ट्रस्ट उठाएगा। ऑपरेशन यूनिक हॉस्पिटल में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित 30 बिस्तरों वाले विशेष वार्ड में किए जाएंगे। ऑपरेशन के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के साथ अभिभावक के रूप में मौजूद रहेंगी।
शिविर में दिव्यांग बच्चों के अलावा करीब 250 अन्य बच्चों और बुजुर्गों का भी स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से लगभग 50 बच्चों को आगे के इलाज के लिए चिन्हित किया गया। यह शिविर महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुशंसा पर आयोजित किया गया था।
शिविर में आरोग्य भारती मालवा प्रांत के डॉ. दिवाकर पटेल, श्री मनीष अग्रवाल, नीमा इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स रिहेबिलिटेशन ट्रस्ट के डॉ. प्रमोद नीमा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक राजेश मेहरा सहित चिकित्सक और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
*डॉ. प्रमोद नीमा ने कहा कि* समय पर पहचान और सही इलाज से कई दिव्यांग बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। शिविर का उद्देश्य ऐसे बच्चों तक पहुंचना है, जिन्हें सर्जरी और पुनर्वास की जरूरत है, ताकि वे बेहतर तरीके से अपने दैनिक जीवन की गतिविधियां कर सकें। उन्होंने कहा कि चयनित सभी बच्चों के ऑपरेशन, दवाइयों, फिजियोथेरेपी और अस्पताल में रहने की पूरी व्यवस्था नि:शुल्क की जाएगी, ताकि किसी भी परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े और बच्चों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
