नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच जारी सामरिक तनाव के बीच चीन ने म्यांमार सीमा से लगे अपने युन्नान प्रांत में लार्ज फेज्ड एरे रडार (एलपीएआर) को सक्रिय कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि इस अत्याधुनिक रडार की निगरानी क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत के मिसाइल परीक्षणों पर नजर रखने के साथ-साथ हिंद महासागर के बड़े हिस्से की गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है। चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को लगातार मजबूत कर रहा है। युन्नान में लगाया गया यह नया एलपीएआर रडार उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने, उनकी उड़ान का ट्रैक रखने और तकनीकी सूचनाएं एकत्र करने में सक्षम बताया जा रहा है। भारत के मिसाइल परीक्षणों पर रहेगी नजर विशेषज्ञों का मानना है कि इस रडार की पहुंच भारत के पूर्वी हिस्से, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर तक हो सकती है। इससे ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से होने वाले मिसाइल परीक्षणों की निगरानी संभव हो सकती है। भारत यहीं से अग्नि-5, के-4, के-5 समेत कई उन्नत मिसाइलों का परीक्षण करता है। यदि किसी देश को इन परीक्षणों से जुड़ा उड़ान डेटा और अन्य तकनीकी जानकारी मिल जाती है, तो वह अपने मिसाइल रक्षा तंत्र और प्रतिरोधी रणनीति को उसी आधार पर विकसित कर सकता है। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार मिसाइल परीक्षणों के दौरान प्राप्त होने वाला डेटा किसी भी देश की सामरिक क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इससे मिसाइल की मारक क्षमता, उड़ान प्रोफाइल और प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है। इसी कारण चीन के इस नए रडार को भारत की सुरक्षा के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती माना जा रहा है। हिंद महासागर पर भी निगरानी युन्नान में रडार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि चीन बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के बड़े हिस्से पर भी निगरानी रख सकता है। हिंद महासागर भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र है, जहां भारतीय नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग भी यहीं से गुजरते हैं। ऐसे में चीन की बढ़ती निगरानी भारत की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा सकती है। चीन का निगरानी नेटवर्क हुआ और मजबूत चीन के पास पहले से ही शिनजियांग और कोरला क्षेत्रों में लंबी दूरी के कई रडार सिस्टम मौजूद हैं। युन्नान में नए एलपीएआर के सक्रिय होने से उसकी निगरानी क्षमता और विस्तृत हो गई है। हालांकि इस तैनाती को लेकर भारत या चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भारत को अपनी काउंटर-सर्विलांस तकनीकों, मिसाइल सुरक्षा तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता पड़ सकती है।