डॉक्टर महेन्द्र यादव की पाती थोड़ी जज्बाती
पहले के जमाने में बहुएं ससुराल में आते ही कहती थीं
“माताजी, चरण स्पर्श…”
और आजकल की मॉडर्न बहुएं कहती हैं
“Hi Mom-in-law… Happy Mother’s Day!”
सास बेचारी सोचती रह जाती है कि
“ये बहू आई है या इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स की ब्रांड एम्बेसडर?”
अब जमाना बदल गया है।
पहले बहुएं सुबह 5 बजे उठकर तुलसी को जल देती थीं,
आजकल की बहुएं सुबह 10 बजे उठकर मोबाइल को चार्ज देती हैं।
पहले बहुएं सास से पूछती थीं
“मांजी, खाना क्या बनाऊं?”
अब पूछती हैं —
“मम्मीजी, Swiggy कर दूं या Zomato?”
सास अगर कह दे
“बहू, जरा चाय बना देना…”
तो बहू तुरंत जवाब देती है
“मम्मीजी, Tea is injurious to health!”
और खुद आधे घंटे बाद Cold Coffee लेकर Instagram पर फोटो डाल देती है
“Tea time with family vibes…”
सबसे बड़ा बदलाव तो संबोधन में आया है।
पहले “सासू मां” कहा जाता था।
अब “Mom” कहा जाता है।
लेकिन फर्क इतना है कि
पहले वाली “मां” में अपनापन था,
और आज वाली “Mom” में WiFi password पूछने की संभावना ज्यादा रहती है।
लेकिन सारी गलती बहुओं की भी नहीं है।
समय बदल गया है, पर रिश्तों की मिठास नहीं बदलनी चाहिए।
बहू अगर आधुनिक है तो सास को भी थोड़ा अपडेट होना पड़ेगा,
और बहू को भी यह समझना होगा कि
जिस घर में वह आई है, वहां की बुजुर्ग महिला सिर्फ “husband की mother” नहीं,
उस घर की संस्कृति और अनुभव की यूनिवर्सिटी होती है।
मदर्स डे सिर्फ अपनी मां के साथ फोटो डालने का दिन नहीं,
बल्कि उस सास को भी सम्मान देने का दिन है
जिसने अपना बेटा 25 साल पालकर आपको “lifetime free subscription” में दे दिया।
और बहुओं के लिए छोटा सा संदेश
सास से बहस जीतने में कोई महानता नहीं,
उनका दिल जीतने में असली समझदारी है।
क्योंकि घर वही स्वर्ग बनता है
जहां बहू आधुनिक हो सकती है,
लेकिन संस्कारों का WiFi हमेशा “Connected” रहे।
और अंत में सासों के लिए भी एक सलाह
बहू को बेटी मानिए, CID की संदिग्ध अपराधी नहीं।
फिर देखिए…
मदर्स डे पर वही बहू आपके साथ सेल्फी डालकर लिखेगी —
“World’s Best Saasu Maa ”
