रतलाम। आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ, मध्य प्रदेश ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान में चल रही नई पंजीकरण प्रक्रिया को तुरंत बंद करने और अनुभवी शिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश भर के स्कूलों में पिछले 18 वर्षों से अतिथि शिक्षक पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में शासन द्वारा फिर से नवीन पंजीकरण शुरू करना पुराने और अनुभवी शिक्षकों के साथ ‘कुठाराघात’ है। संघ का तर्क है कि जब प्रदेश में पहले से ही लाखों पंजीकृत अनुभवी शिक्षक मौजूद हैं, तो नए पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है। ज्ञापन में अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से दो मुख्य मांगें रखी हैं , नवीन पंजीकरण पर रोक लगाकर अतिथि शिक्षकों के नए पंजीकरण को पूर्णतः बंद किया जाए वहीं अनुभव आधारित बोनस को पुराने अतिथि शिक्षकों को उनके कार्य अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर 10 अंक प्रति वर्ष का बोनस दिया जाए। यह लाभ अधिकतम 18 वर्षों के लिए (कुल 180 अंक) सत्र 2026-27 के स्कोर कार्ड में जोड़ा जाए। आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ के रतलाम जिला अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया सैनी ने पत्र में चेतावनी दी है कि भुखमरी कि कगार पर हैं परिवार यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वर्षों से सेवा दे रहे हजारों अनुभवी शिक्षक बेरोजगार होकर सड़क पर आ जाएंगे। उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा, जिसका सीधा दोष सरकार और आला अधिकारियों का होगा। पत्र रतलाम जिला कलेक्टर के माध्यम से आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय को प्रेषित किया गया है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि अनुभवी शिक्षकों को उनकी ‘तपस्या और सेवा’ का उचित लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके परिवारों का भरण-पोषण सुनिश्चित हो सके।
