वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा के इतिहास में एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन दर्ज हो गया। मोदी सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026*– जिसमें महिला आरक्षण को परिसीमन (delimitation) और लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी (543 से 850 तक) के साथ जोड़ा गया था – मात्र 298 सांसदों के समर्थन और 230 के विरोध के साथ गिर गया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (लगभग 352 वोट) नहीं मिल सका। इसके साथ ही सरकार ने Delimitation Bill और Union Territories Laws Amendment Bill भी आगे नहीं बढ़ाए।
यह बिल मूल रूप से *नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को व्यावहारिक रूप देने वाला था। 2023 का कानून तो पास हो चुका था, लेकिन उसका अमल परिसीमन और सीट बढ़ोतरी के बाद ही होता। आज का बिल ठीक उसी कमी को पूरा करने वाला था। फिर भी कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने इसे रोक दिया।
मैं, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष के रूप में, पूर्ण जानकारी देते हुए कहता हूँ कि यह कांग्रेस का आत्मघाती कदम साबित होगा।
क्यों गिरा बिल? सच्चाई क्या है
विपक्ष (कांग्रेस, सपा, राजद आदि) का कहना था कि परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो जाएँगी और उत्तर-दक्षिण असंतुलन बढ़ेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटें तय की गई थीं। 50 साल बाद 2026 में सीटें बढ़ाना और नए सिरे से परिसीमन करना लोकतंत्र की मांग थी। महिला आरक्षण को इसी के साथ जोड़ना सरकार का दूरदर्शी कदम था। विपक्ष ने इसे “राजनीतिक खेल” बताया, जबकि असल खेल विपक्ष ने खेला।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं ने बिल का विरोध किया। उनका एकमात्र उद्देश्य था – मोदी सरकार को किसी भी कीमत पर झटका देना। महिला सशक्तिकरण, दक्षिण राज्यों की चिंता या जाति जनगणना जैसे मुद्दे सिर्फ़ बहाने थे।
कांग्रेस के लिए क्यों आत्मघाती? विस्तार से समझें
1. *महिलाओं का वोट बैंक हमेशा के लिए खो जाएगा
भारत में 50% से ज्यादा आबादी महिलाओं की है। 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरे देश ने सराहा था। आज जब उसे अमली जामा पहनाने का मौका था, कांग्रेस ने उसे रोक दिया। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसी राज्यों में महिलाएँ अब कांग्रेस को “महिला विरोधी” मानेंगी। 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में यह गुस्सा कांग्रेस को भारी पड़ेगा।
2. दशकों पुराना वादा तोड़ा*
कांग्रेस 1996 से महिला आरक्षण की बात करती रही, लेकिन कभी पास नहीं करा पाई। 2010 में राज्यसभा में पास किया, लेकिन लोकसभा में लटका दिया। मोदी सरकार ने 2023 में पास किया और 2026 में अमल के लिए बिल लाया। कांग्रेस ने आज फिर रोड़ा अटकाया। जनता अब यह साफ देख रही है कि कांग्रेस सिर्फ़ वादे करती है, भाजपा पूरा करती है।
3. *दक्षिण राज्यों का मुद्दा सिर्फ़ बहाना
परिसीमन पूरे देश के लिए है। दक्षिण के राज्य जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर रहे, तो उनकी सीटें कम होना स्वाभाविक है। लेकिन कांग्रेस ने इसे “उत्तर vs दक्षिण” का मुद्दा बना दिया। असल में कांग्रेस दक्षिण में अपनी सिकुड़ती हुई राजनीति को बचाने की कोशिश कर रही है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तो यह बिल महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देता। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की महिलाओं का भी हक मारा।
4. हिंदू समाज की दृष्टि में महिला सम्मान
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन सनातन संस्कृति का प्रचार करती है। हमारे शास्त्रों में नारी को शक्ति का रूप माना गया है – दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती। महिला आरक्षण सनातन मूल्यों के अनुरूप है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक स्वार्थ के लिए रोककर हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।
5. 2029 चुनाव में भाजपा को मिलेगा बड़ा हथियार*
भाजपा अब हर रैली, हर बूथ पर कहेगी – “कांग्रेस ने महिला आरक्षण को रोका”। मध्य प्रदेश में तो यह मुद्दा और भी तीखा हो जाएगा क्योंकि यहाँ महिलाओं ने भाजपा को भारी समर्थन दिया है। कांग्रेस की यह गलती उसके संगठन को और कमजोर करेगी।
निष्कर्ष
आज का दिन कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक गलती का दिन साबित होगा। महिला आरक्षण न सिर्फ़ लोकतंत्र को मजबूत करता, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाता। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश इस बिल के समर्थन में हमेशा खड़ा रहा और रहेगा। हम सभी हिंदू संगठनों, महिला संगठनों और देशभक्त नागरिकों से अपील करते हैं कि इस मुद्दे को उठाएँ।
कांग्रेस को अब समझ आ जाना चाहिए – *राजनीति में महिलाओं का अपमान कभी माफ़ नहीं किया जाता यह कदम न सिर्फ़ उनके लिए आत्मघाती है, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन को भी भारी पड़ने वाला है।
