श्री संजय अग्रवाल, प्रदेशाध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में 12 अप्रैल 2026 से पंचकोशी यात्रा प्रारंभ हो रही है। लगभग 118 किलोमीटर लंबी यह पवित्र परिक्रमा सनातन धर्म की आस्था, भक्ति और मोक्ष का प्रमुख प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि 84 महादेवों के दर्शन से 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक महत्व
पंचकोशी यात्रा का उल्लेख स्कंद पुराण के अवंति खंड में मिलता है। उज्जैन को चतुर्भुज स्वरूप में मानकर इसकी पंचकोशी परिक्रमा का विधान बताया गया है। मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा था कि अवंती नगरी स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है, जहां भक्ति और मोक्ष दोनों सहज उपलब्ध हैं।
त्रेता युग की कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने अपने पिता महाराज दशरथ को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए इस यात्रा का अनुष्ठान किया था। इसलिए इसे पितृ-ऋण से मुक्ति और पाप-नाश का भी प्रमुख साधन माना जाता है।
84 महादेवों का महत्व
उज्जैन में स्थित 84 शिवलिंगों के दर्शन को अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धालु सादगी और भक्ति के साथ पूरी यात्रा कर इन सभी महादेवों का पूजन करते हैं, जिससे जीवन के दोषों का निवारण और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
यात्रा का आयोजन
यात्रा का शुभारंभ नागचंद्रेश्वर मंदिर से होगा। श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर यात्रा प्रारंभ करते हैं। यह यात्रा लगभग 5 दिनों में पूर्ण होकर वैशाख कृष्ण अमावस्या को समाप्त होती है। हर वर्ष 2 से 3 लाख श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
श्रद्धालुओं में उत्साह
इंदौर, बड़नगर, इंगोरिया सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि कई युवा इस दौरान सोशल मीडिया से दूर रहने का संकल्प लेकर आध्यात्मिक साधना में जुड़ रहे हैं।
फेडरेशन की अपील
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक संख्या में यात्रा में शामिल होने की अपील की है। साथ ही यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखने को कहा है।
सेवा कार्य
फेडरेशन के प्रदेश महामंत्री रोहित मित्तल की टीम द्वारा कानीपुरा रोड पर यात्रा अवधि में श्रद्धालुओं के लिए छाछ वितरण की सेवा की जाएगी।