संजय अग्रवाल
मध्य प्रदेश सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इसी मानसून सत्र में **यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)** को लागू करने का विधेयक सदन में पेश किया जाएगा। यह निर्णय न केवल मध्य प्रदेश के लिए बल्कि समूचे भारत के लिए एक स्वर्णिम क्षण है। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश ने लंबे समय से UCC की मांग की है और आज हम इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान सिविल कानून सुनिश्चित करेगा”। यह निर्देशक सिद्धांत (Directive Principle) 75 वर्षों से अधर में लटका हुआ था। केवल कुछ राज्यों—उत्तराखंड ने 2024 में UCC लागू किया—ने इस दिशा में साहस दिखाया। अब मध्य प्रदेश इस सूची में शामिल होने जा रहा है। यह कोई साधारण कानून नहीं है; यह **राष्ट्रीय एकता, लिंग समानता और संवैधानिक न्याय** का प्रतीक है।
UCC क्यों जरूरी है?
1. **धर्म-आधारित भेदभाव का अंत**
वर्तमान में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों के अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। एक ही देश में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और संपत्ति के अधिकार पर अलग-अलग नियम। यह “एक राष्ट्र, एक कानून” की अवधारणा के विरुद्ध है। UCC लागू होने से हर नागरिक—चाहे वह किसी भी धर्म का हो—एक समान कानून के अधीन आएगा।
2. **महिलाओं के अधिकारों की रक्षा**
कई पर्सनल लॉ महिलाओं के साथ अन्याय करते हैं—त्रिपल तलाक (जो 2019 में बैन हुआ, लेकिन अन्य प्रथाएं बाकी हैं), बहुविवाह, असमान उत्तराधिकार आदि। UCC इन सभी कुरीतियों को समाप्त करेगा। उत्तराखंड के UCC एक्ट, 2024 में 18 वर्ष से कम उम्र की शादी, बहुविवाह और हलाला जैसी प्रथाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। मध्य प्रदेश में भी यही मॉडल अपनाया जाना चाहिए।
3. **राष्ट्रीय एकीकरण**
आजादी के बाद 78 वर्ष बीत गए, फिर भी हम धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों में बंटे हुए हैं। UCC देश को “भारतीय” पहचान देगा। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन का मानना है कि हिंदू धर्म की मूल भावना “वसुधैव कुटुम्बकम्” है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब कानून भी समान हो।
4. **सामाजिक न्याय और आधुनिक भारत**
UCC लागू होने से मुकदमों की संख्या कम होगी, अदालतों का बोझ घटेगा और प्रशासनिक सुगमता बढ़ेगी। युवा पीढ़ी को एक आधुनिक, समान और न्यायपूर्ण भारत मिलेगा।
मध्य प्रदेश के संदर्भ में UCC
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही संकेत दे दिया है कि कानून बनाने में उत्तराखंड मॉडल को आधार बनाया जाएगा, लेकिन कुछ राज्य-विशेष प्रावधान भी जोड़े जाएंगे। हम वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की ओर से सरकार से कुछ सुझाव रखना चाहते हैं:
– **18 वर्ष से कम उम्र की शादी पर पूर्ण प्रतिबंध** और 21 वर्ष से कम उम्र के विवाह को अवैध घोषित करना।
– **बहुविवाह पर पूर्ण रोक**।
– **समान उत्तराधिकार**—पुत्री और पुत्र को समान अधिकार।
– **लाइव-इन रिलेशनशिप** को रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर सुरक्षा प्रदान करना।
– **धर्मांतरण विवाह** पर कड़ी रोक और सजा का प्रावधान।
– **केंद्रीय हिंदू कोड** (1955-56) में भी सुधार कर उसे UCC के अनुरूप बनाना।
मध्य प्रदेश की 7.5 करोड़ जनता में हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन हमारी मांग केवल हिंदू हित में नहीं है—यह **सभी भारतीयों** के हित में है। मुस्लिम बहनों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि वर्तमान पर्सनल लॉ उनके अधिकारों की सबसे ज्यादा हनन करता है।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की भूमिका
हमने पिछले कई वर्षों से पूरे मध्य प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाए—इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित सभी प्रमुख शहरों में रैलियां, सेमिनार और हस्ताक्षर अभियान आयोजित किए। हमने जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। आज जब सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है, तो हम पूर्ण समर्थन देते हैं। हमारा संगठन किसी भी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं है, लेकिन राष्ट्रहित में हम हर सकारात्मक कदम का स्वागत करते हैं।
चुनौतियां और हमारा संकल्प
कुछ तत्व UCC को “हिंदुत्व का एजेंडा” बताकर भ्रम फैला रहे हैं। यह सरासर गलत है। UCC **संवैधानिक एजेंडा** है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार (शाह बानो केस 1985, सर्वोच्च न्यायालय के हालिया टिप्पणियों में) UCC लागू करने की सिफारिश की है।
हम मध्य प्रदेश सरकार से अपील करते हैं कि:
– विधेयक को बिना किसी समझौते के पारित करें।
– जनता के साथ व्यापक चर्चा करें, लेकिन निर्णय में देरी न करें।
– लागू होने के बाद जागरूकता अभियान चलाकर हर नागरिक को कानून की जानकारी दें।
**मध्य प्रदेश अब UCC का अगला गढ़ बनेगा।**
यह मानसून सत्र इतिहास रचेगा। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्य प्रदेश का हर कार्यकर्ता इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करेगा।
- *(लेखक श्री संजय अग्रवाल* वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हैं )
