श्री संजय अग्रवाल
माननीय स्वर्गीय महात्मा गांधी ने कहा था कि “हिंदू-मुस्लिम एकता तभी संभव है जब दोनों पक्ष समान अधिकारों और सुरक्षा के साथ रहें।” लेकिन आज केरल में जो हो रहा है, वह न केवल हिंदू समाज के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरे भारत के सनातन धर्मावलंबियों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करता है। हाल ही में राहुल गांधी जी ने इडुक्की में एक कार्यक्रम में ‘द केरल स्टोरी-2’ जैसे सच्चे दस्तावेज़ी फिल्मों को “थिएटर हॉल खाली हैं, कोई देख नहीं रहा” कहकर खारिज कर दिया। यह बयान न केवल हिंदू बेटियों के साथ हो रहे धोखे, प्रेम जिहाद और जबरन धर्मांतरण की सच्चाई को नकारने वाला है, बल्कि केरल की कम्युनिस्ट सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण नीति को बढ़ावा देने वाला भी है।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश इकाई के रूप में हम इस मुद्दे को केरल चुनाव (9 अप्रैल) के संदर्भ में पूरी गहराई से समझना चाहते हैं। केरल की 140 विधानसभा सीटों में से 70 सीटें उन 6 जिलों (कासरगोड, कोझीकोड, थ्रिस्सूर, मलप्पुरम, कन्नूर और पलक्कड़) में हैं जहाँ मुस्लिम आबादी 30% से अधिक है। हिंदू ऐक्य वेदी के अध्यक्ष आर.वी. बाबू के अनुसार, 2015 से 2025 तक 10 वर्षों में **5000 से अधिक हिंदू लड़कियों को धोखे से इस्लाम में परिवर्तित** किया गया है। हर महीने 10-12 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। आर्य विद्या समाजम और अन्य हिंदू संगठनों द्वारा चलाए जा रहे काउंसलिंग सेंटरों में सैकड़ों परिवार अपनी बेटियों को बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
सबसे दर्दनाक उदाहरण सोना एल्डोस का है। कोच्चि एयरपोर्ट पर काम करने वाले रामिज़ नामक व्यक्ति (जो पहले से शादीशुदा था और दो बच्चे का पिता था) ने सोना को धोखे से फंसाया। शादी के बाद जब सच्चाई सामने आई तो सोना ने आत्महत्या कर ली। उसकी सुसाइड नोट में रामिज़ का नाम और “पोन्नानी” (इस्लामी केंद्र) का जिक्र था। एक पुजारी की बेटी भी इसी तरह लिव-इन रिलेशनशिप में फँस गई, परिवार को धमकियाँ मिलीं और अब वे अलग-थलग जीवन जी रहे हैं। क्या ये “लव जिहाद” नहीं है? क्या राहुल गांधी जी इन पीड़ित परिवारों से मिलने जाएँगे या फिर “थिएटर खाली हैं” कहकर मुंह फेर लेंगे?
**मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की बेटी की शादी और दोहरा मापदंड**
केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की बेटी टी. वीणा का 2020 में डीवाईएफआई अध्यक्ष पी.ए. मोहम्मद रियास से इंटरफेथ विवाह हुआ था। भाजपा और हिंदू संगठन इसे उदाहरण के रूप में पेश कर रहे हैं कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट परिवार खुद “लव जिहाद” का समर्थन करता है, जबकि आम हिंदू परिवारों की बेटियाँ शिकार बन रही हैं। कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने इसे “व्यक्तिगत मामला” बताकर खारिज किया, लेकिन जब हिंदू संगठन सवाल उठाते हैं तो “प्रोपेगैंडा” कहते हैं। यह दोहरा मापदंड है।
**मोनालिसा (कुंभ गर्ल) का केस: “रियल केरल स्टोरी” या राजनीतिक चाल?**
अभिनेत्री मोनालिसा भोसले (कुंभ मेले वाली लड़की) ने हाल ही में फरमान खान से केरल मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। खुद मोनालिसा ने कहा, “मैंने मर्जी से शादी की, किसी ने दबाव नहीं बनाया।” सीपीएम नेता थॉमस आइजक ने इसे “रियल केरल स्टोरी” कहकर पोस्ट किया। सीपीएम के वरिष्ठ नेता सेबेस्टियन पॉल ने कहा कि पार्टी ने मोनालिसा को सुरक्षा दी और मंत्री ने आशीर्वाद दिया।
हम पूछते हैं – अगर यह “रियल स्टोरी” है तो सोना एल्डोस, पुजारी की बेटी और 5000 अन्य हिंदू लड़कियों की कहानी क्या है? क्यों सीपीएम केवल उन मामलों को बढ़ावा देता है जो मुस्लिम वोट बैंक को खुश करें? मोनालिसा का विवाह हिंदू रीति से हुआ, लेकिन क्या सभी हिंदू लड़कियों को यही सुरक्षा मिलती है? वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन का मानना है कि ऐसे चयनित मामलों को “प्रगतिशील” दिखाकर असली मुद्दे को दबाया जा रहा है।
**राहुल गांधी का बयान: हिंदू भावनाओं का अपमान**
राहुल गांधी का बयान “थिएटर हॉल खाली हैं” न केवल ‘द केरल स्टोरी’ फिल्म को, बल्कि पूरे हिंदू समाज को अपमानित करता है। फिल्म में दिखाए गए सैकड़ों वास्तविक मामले हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद केरल के सिनेमाघरों में नहीं दिखाए गए। मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने इसे “बीजेपी प्रोपेगैंडा” कहकर बैन करने की कोशिश की। क्या यह लोकतंत्र है? क्या हिंदू बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा अब “बीजेपी प्रोपेगैंडा” बन गया है?
ईसाई समुदाय के फादर माइकल पुल्लिक भी स्वीकार करते हैं कि उनकी कम्युनिटी भी इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों का शिकार हो रही है। उन्होंने एक हेल्पलाइन शुरू की है जिसमें एक साल में 22 लड़कियाँ (9 नाबालिग) मदद मांग चुकी हैं। क्या कांग्रेस और सीपीएम इन आंकड़ों को भी “बकवास” कहेंगे?
**वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन का आह्वान**
मध्य प्रदेश की भूमि से, जहाँ हम हिंदू एकता के लिए निरंतर संघर्षरत हैं, मैं केरल के हिंदू भाइयों-बहनों से अपील करता हूँ – 9 अप्रैल के चुनाव में केवल वोट नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की इज्जत, सनातन संस्कृति और हिंदू अस्मिता के लिए वोट दें। हिंदू ऐक्य वेदी, आर्य विद्या समाजम और अन्य संगठनों के साथ मिलकर हम केरल में भी काउंसलिंग सेंटर, जागरूकता अभियान और कानूनी सहायता बढ़ाएंगे।
केरल की कम्युनिस्ट-कांग्रेस गठबंधन सरकार हिंदू-ईसाई दोनों समुदायों की बेटियों को इस्लामी जाल में फँसने से बचाने में नाकाम रही है। 5000 धर्मांतरण के आंकड़े झूठे नहीं हैं – ये परिवारों के आंसू, आत्महत्याएँ और टूटे सपने हैं।
**समय आ गया है हिंदू जागने का।**
‘द केरल स्टोरी’ कोई फिल्म नहीं, बल्कि वास्तविकता है। राहुल गांधी, पिनारायी विजयन और सीपीएम को याद रखना चाहिए – हिंदू अब चुप नहीं रहेगा। हम अपनी बेटियों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।
(लेखक श्री संजय अग्रवाल वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष हैं। लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी है। माधव एक्सप्रेस प्रबंधन एवं संपादक की इनसे सहमति या कोई संबंध नहीं है। )
