माधव एक्सप्रेस / इंदौर, 16 मार्च 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले 26 वर्षीय छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा की कनाडा में संदिग्ध मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कनाडा में उच्च शिक्षा के लिए गए इस युवा की मौत को परिवार हत्या मान रहा है, जबकि कनाडाई अधिकारी इसे एक विवाद के दौरान हुई दुर्घटना बता रहे हैं। इस दुखद घटना के बीच, परिवार को बॉडी भारत लाने में भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कनाडा सरकार द्वारा बॉडी सौंपने के लिए 35 लाख रुपये की मांग की जा रही है, जबकि उज्जैन तक बॉडी लाने में अतिरिक्त 10 लाख रुपये का खर्च अलग से लगेगा। इस स्थिति में वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष श्री संजय अग्रवाल ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि बॉडी को जल्द से जल्द भारत लाया जाए और सहानुभूति पूर्वक कोई भी पैसा नहीं लिया जाए। यह अपील न केवल परिवार की मदद के लिए है, बल्कि विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक मुद्दा उठाती है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय डॉ मोहन यादव ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और सहायता का आश्वासन दिया है, लेकिन परिवार को तत्काल मदद की जरूरत है।
त्वरित हस्तक्षेप: वर्तमान में बॉडी लाने की प्रक्रिया में 3 सप्ताह लग सकते हैं, जो परिवार के लिए और दुखद है। उन्होंने विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया कि भारतीय दूतावास कनाडा में सक्रिय होकर प्रक्रिया को तेज करे।
आर्थिक सहायता: परिवार की गरीबी को देखते हुए, सभी शुल्क माफ किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कनाडा सरकार कोई फीस मांग रही है, तो भारत सरकार कवर करने के लिए फंड जारी करे
छात्रों की सुरक्षा: यह अपील केवल इस परिवार तक सीमित नहीं है। श्री अग्रवाल ने मांग की कि विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा के लिए एक स्थायी नीति बनाई जाए, जिसमें आपात स्थिति में तत्काल सहायता शामिल हो।
समुदाय की एकजुटता: वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के माध्यम से उन्होंने हिंदू समुदाय से अपील की कि वे परिवार की मदद के लिए आगे आएं।
श्री अग्रवाल ने कहा, “हमारे युवा विदेश जाकर देश का नाम रोशन करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं में सरकार को माता-पिता का सहारा बनना चाहिए। यह अपील सभी भारतीयों की ओर से है।”
गुरकीरत सिंह मनोचा की मौत न केवल एक परिवार का दुख है, बल्कि विदेश में भारतीय छात्रों की बढ़ती असुरक्षा का प्रतीक है
