कभी-कभी कलाकार मंच पर नहीं आता, बल्कि यादों की कोई पुरानी शक्ल हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती है। हाल ही में जब मैंने सुनील ग्रोवर को कादर खान की मिमिक्री करते देखा, तो सच कहूँ — उसे केवल “मिमिक्री” कहना उस कला के साथ थोड़ा अन्याय होगा। कुछ मिनटों के लिए ऐसा लगा जैसे कादर खान साहब की रूह ही उनके भीतर उतर आई हो। वही संवाद की ठहराव भरी लय, वही आवाज़ का कंपन, वही आँखों की मासूम शरारत।
यह वही कलाकार है जो कभी अमिताभ बच्चन बन जाता है, कभी आमिर खान की टोन पकड़ लेता है, कभी सलमान खान का अंदाज़ ओढ़ लेता है, तो कभी कपिल देव की बॉडी लैंग्वेज को इस सफाई से उठा लेता है कि कुछ क्षणों के लिए असली और नकली का फर्क मिट जाता है।
लेकिन सुनील ग्रोवर की कला केवल मिमिक्री तक सीमित नहीं है।
“डॉक्टर मशहूर गुलाटी” और “गुत्थी” जैसे किरदारों के जरिए उन्होंने यह साबित किया है कि कॉमेडी केवल चुटकुलों का कारोबार नहीं होती। कॉमेडी असल में अभिनय, टाइमिंग, चेहरे की भाषा और गहरी ऑब्ज़र्वेशन का विज्ञान है। आज के समय में जहाँ हास्य का एक बड़ा हिस्सा सस्ते मज़ाक और भद्दे इशारों में उलझ जाता है, वहाँ सुनील ग्रोवर बिना किसी अश्लीलता के, सिर्फ अपने अभिनय और बेमिसाल टाइमिंग से लोगों को हँसाने का हुनर रखते हैं।
और सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतने वर्षों की लोकप्रियता के बावजूद उनके चेहरे पर न घमंड दिखाई देता है, न उनके नाम से कोई बड़ा विवाद जुड़ा है। न उन्होंने कभी किसी के खिलाफ बयानबाज़ी की, न ही बड़े फिल्मी हीरो बनने की कोई अधीर इच्छा दिखाई। बस चुपचाप अपना असली हुनर लेकर मंच पर आते हैं और हर बार दर्शकों को चौंका कर चले जाते हैं।
कई बार यह सोचकर हैरानी होती है कि कॉमेडी अभिनय और बहुमुखी प्रतिभा के मामले में शायद कपिल शर्मा भी उनके सामने छोटा पड़ जाए। फर्क बस इतना है कि किसी के हिस्से बड़ा मंच और चमकदार शो आ जाते हैं, और किसी के हिस्से केवल असाधारण प्रतिभा।
किस्मत भी बड़ी अजीब चीज़ है।
कभी कलाकार छोटा नहीं होता… मंच छोटा पड़ जाता है।
सुनील ग्रोवर उन कलाकारों में से हैं जिन्हें जितना मिलना चाहिए था, शायद उतना मिला नहीं। लेकिन सच्चाई यह है कि असली कलाकार की पहचान तालियों से नहीं, यादों से होती है। तालियाँ तो उस समय बजती हैं जब कलाकार सामने होता है, लेकिन यादें तब भी साथ रहती हैं जब मंच खाली हो चुका होता है।
और सुनील ग्रोवर उन्हीं कलाकारों में से हैं — जो अपनी शुद्ध प्रतिभा से मंच पर हर बार आग लगा देते हैं।
