मुंबई। समय के साथ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव का दौर आया है। पहले हीरो-प्रधान फिल्मों का जलवा हर तरफ देखने को मिलता था, लेकिन अब महिला प्रधान फिल्मों ने अपनी मजबूत पहचान बना ली है। इस बदलाव की अहम कड़ी रही हैं तापसी पन्नू, जिनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ आज सिनेमाघरों में दस्तक दे रही है। तापसी के करियर को देखें तो उन्होंने अनेक ऐसी फिल्में की हैं, जिनका केंद्र वुमेन इंपावरमेंट सामाजिक जागरूकता और मजबूत महिला किरदार रहे हैं। तापसी पन्नू की महिला-प्रधान फिल्मों की शुरुआत ओटीटी पर बड़ी सफलता पाने वाली बदला से और मजबूत हुई। इस फिल्म में वह अपने प्रेमी के मर्डर केस में फंसी एक ऐसी महिला बनीं, जो खुद को निर्दोष साबित करने की जद्दोजहद करती है। उनकी दमदार परफॉर्मेंस को खूब सराहना मिली और यह फिल्म आईएमडीबी पर 7.7 रेटिंग तक पहुंची। इससे पहले तापसी ने पिंक में काम किया था, जिसका ‘नो मींस नो’ संवाद समाज में नई सोच जगाने वाला साबित हुआ। फिल्म ने महिलाओं की मर्जी, सहमति और भावनाओं के सम्मान पर जोर देते हुए संकीर्ण सोच पर करारा वार किया। साल 2020 में आई उनकी फिल्म थप्पड़ ने घरेलू हिंसा के मुद्दे को बेहद संवेदनशील तरीके से उजागर किया। फिल्म ने दिखाया कि हिंसा एक ‘थप्पड़’ से शुरू होती है और यह महिलाएं किस तरह अपने सम्मान की लड़ाई लड़ती हैं। इस फिल्म ने न केवल आलोचकों की प्रशंसा हासिल की, बल्कि वर्ल्डवाइड 44 करोड़ से अधिक का बिज़नेस भी किया। महिला सशक्तिकरण की बात हो तो सांड की आंख का जिक्र जरूरी है। इसमें तापसी ने प्रकाशी तोमर की भूमिका निभाई वह 60 वर्ष की उम्र में शूटिंग चैंपियन बनीं। यह फिल्म दो बुजुर्ग महिलाओं की प्रेरक कहानी पेश करती है, जो पितृसत्तात्मक समाज की बेड़ियों को तोड़कर अपनी पहचान बनाती हैं। साल 2021 की रश्मि रॉकेट भले बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता न पा सकी, लेकिन महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले भेदभाव, जेंडर टेस्टिंग और हाइपरएंड्रोजेनिज्म जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए इसे खूब सराहा गया। इसके अलावा तापसी की ‘हसीन दिलरुबा’, ‘ब्लर’, ‘शाबाश मिठू’ और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्में भी उनकी मजबूत और बहुआयामी परफॉर्मेंस की गवाह हैं।
