इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में जीवन शैली, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े बदलाव अब कैंसर के पैटर्न को भी स्पष्ट रूप से प्रभावित कर रहे हैं। भारत में कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है और आज भी टिशू बायोप्सी, कैंसर की सटीक पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका मानी जाती है। बायोप्सी से प्राप्त आंकड़े कैंसर के पैटर्न को समझने में अहम भूमिका निभाते हैं। इंदौर स्थित कोकिलाबेन में की गई बायोप्सी सैंपल्स की जांच में कई खास जानकारियां प्राप्त हुई।
कुल 1445 बायोप्सी सैंपल्स की जांच
इंदौर स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल की डॉ. शिल्पी दोसी, कन्सल्टेन्ट, हिस्टोपैथोलॉजी द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में कुल 1445 बायोप्सी सैंपल्स की जांच की गई। इनमें से 515 मामले (35.6%) कैंसर यानी मैलिग्नेंट पाए गए। इनमें मुख्य रूप से स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए। यह आंकड़ा न सिर्फ कैंसर की मौजूदगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि किन अंगों में जोखिम अधिक देखा जा रहा है।
बायोप्सी रिपोर्ट्स के अनुसार इन अंगों में अधिक कैंसर पाया गया
– स्तन (Breast): 126 में से 95 केस (75%)
– हेड एंड नेक: 346 में से 198 केस (57%)
– फेफड़े (Lung): 286 में से 84 केस (30%)
– प्रोस्टेट: 207 में से 52 केस (25%)
यह डेटा साफ बताता है कि इंदौर में कैंसर के कुल मामलों में स्तन कैंसर का पॉजिटीविटी रेट 75% पाया गया जो कि महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन चुका है। वहीं हेड एंड नेक कैंसर का पॉजिटीविटी रेट 57% पाया गया तथा लंग कैंसर का पॉजिटीविटी रेट 30% पाया गया। ये दोनों ही प्रकार के कैंसर पुरुषों में सबसे अधिक पाए गए।
इंदौर में सबसे अधिक मिलने वाले कैंसर के कारण
– ब्रेस्ट कैंसर: इंदौर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले महिलाओं में अधिक देखे जा रहे हैं। इसके पीछे बदलती जीवनशैली, देर से विवाह व मातृत्व, कम स्तनपान, तनाव और हार्मोनल बदलाव जैसे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
– हेड एंड नेक कैंसर: पुरुषों में हेड एंड नेक कैंसर का खतरा अधिक पाया गया है, जिसका मुख्य कारण तंबाकू, गुटखा, धूम्रपान और शराब का बढ़ता सेवन है।
– लंग कैंसर: लंग कैंसर अब केवल धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रहा। बायोप्सी डेटा के अनुसार एडेनोकार्सिनोमा सबसे आम प्रकार बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और पर्यावरणीय कारक भी इंदौर जैसे शहरों में कैंसर का कारण बन रहा है।
फ्रोजन सेक्शन एनालिसिस कैंसर के सटीक इलाज में महत्वपूर्ण
कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में फ्रोजन सेक्शन एनालिसिस एक भरोसेमंद तकनीक के रूप में सामने आया है। हॉस्पिटल में उपलब्ध अत्याधुनिक क्रायोस्टैट मशीनों से अब तक 610 फ्रोजन सेक्शन किए जा चुके हैं। इनमें 465 केस हेड-एंड-नेक कैंसर, 73 ब्रेस्ट कंजरविंग सर्जरी, 57 न्यूरो/ब्रेन सर्जरी तथा बाकी के गायनेकोलॉजी व आंतों की सर्जरी से जुड़े रहे। यह तकनीक ऑपरेशन के दौरान ही कैंसर की पुष्टि, मार्जिन चेक और फैलाव का आकलन करती है। 95.5% सटीकता के साथ फ्रोजन सेक्शन कैंसर की पुनरावृत्ति और दोबारा सर्जरी की जरूरत को कम कर रहा है, जिससे इंदौर के मरीजों को सटीक इलाज स्थानीय स्तर पर मिल रहा है।
बायोप्सी को लेकर जागरुकता आवश्यक
अधिकतर लोग डर की वजह बायोप्सी जैसी प्रक्रिया से बचना चाहते हैं लेकिन बायोप्सी से सटीक निदान होने से जल्द इलाज करवाना आसान हो जाता है ताकि किसी बड़ी गंभीर परेशानी के घटित होने से बचा जा सकता है।
कोकिलाबेन हॉस्पिटल, इंदौर के बायोप्सी आंकड़े यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह है जिसके कारण कैंसर की समस्या देखी जा रही है। जिसके लिए जांच करवाना बेहद जरुरी हो गया है। खासतौर से ब्रेस्ट कैंसर के लिए महिलाओं को अपनी समय पर जांच करानी चाहिए। कैंसर के आंकड़ो को देखते हुए लोगों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लें, तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाएं, संतुलित जीवन शैली अपनाएं और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच, जागरूकता और स्वस्थ जीवन शैली यही कैंसर से लड़ने की सबसे मजबूत रणनीति है।
