उज्जैन, 13 फरवरी। दशहरा मैदान पर वन विभाग द्वारा आयोजित 6 दिवसीय श्री महाकाल वन मेला में आयुर्वेद और वनोपज उत्पादों को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मेले में लगाए गए 250 भव्य एवं आकर्षक स्टॉलों पर अकाष्ठीय वनोपज, ग्रामीण आजीविका, हर्बल उद्यमिता, संरक्षण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े उत्पादों की बिक्री हो रही है।
मेले में 76 स्टॉल प्राथमिक लघु वनोपज समितियों और वन धन केंद्रों के, 76 स्टॉल निजी उद्यमियों के, 16 स्टॉल विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी के तथा 16 स्टॉल वन आधारित फूड ज़ोन के हैं। इसके अलावा 50 स्टॉल निःशुल्क आयुर्वेदिक ओपीडी के लिए समर्पित किए गए हैं, जहां 50 आयुर्वेदिक चिकित्सक और पारंपरिक वैद्य सेवाएं दे रहे हैं।
मेले में परंपरागत वैद्य नब्ज परीक्षण के माध्यम से रोग की पहचान कर निःशुल्क परामर्श दे रहे हैं। परामर्श के बाद लोग आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों की खरीद भी कर रहे हैं।
जबलपुर से आए वैद्य संतोष आनंद जायसवाल ने बताया कि उनके स्टॉल पर गठियावात, मिर्गी, माइग्रेन, दमा, भगंदर, बवासीर, साइटिका, पीलिया, किडनी रोग और प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित मरीज परामर्श लेने पहुंच रहे हैं। वे पिछले 19 वर्षों से वन विभाग द्वारा आयोजित प्रदेश के विभिन्न वन मेलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जटिल रोगों में भी आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी-बूटियों से लाभ मिल रहा है।
मेले के फूड ज़ोन में बांधवगढ़ के गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा की वन भोज रसोई और अलीराजपुर का पारंपरिक दाल-पानिया लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। साथ ही दोना-पत्तल निर्माण, शहद, लाख, कोदो-कुटकी और सबई रस्सी जैसे उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
महुआ फूल, महुआ गुल्ली, साल बीज, आंवला, जामुन, बेल फल, चकोड़ा बीज सहित अनेक वनोपज उत्पादों की बिक्री भी जारी है।
मेले में लगाए गए चीता परिवार एवं डायनासोर के विशाल स्कल्पचर दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हीलचेयर और गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वहीं ओपीडी में उपचार लेने वालों के लिए पृथक बैठक व्यवस्था और बच्चों के लिए आकर्षक किड्स ज़ोन भी बनाया गया है।
वन, वनोपज और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित यह मेला लोगों को पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक उपचार पद्धति से जोड़ने का कार्य कर रहा है।