श्री संजय अग्रवाल
अध्यक्ष, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन (मध्य प्रदेश इकाई)
मदुरै (तमिलनाडु), 5 फरवरी 2026: तिरुप्परंकुंड्रम का प्राचीन अरुलमिगु सुब्रमण्या स्वामी मंदिर भगवान मुरुगन के छह प्रमुख आरुपदै वीडु में से पहला है, जहां सदियों से हिंदू भक्त अपनी आस्था के साथ जुड़े हुए हैं। यह स्थान न केवल धार्मिक महत्व का है, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर का प्रतीक भी है। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025-2026 में, यहां का विवाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मैं, वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के रूप में, इस मुद्दे पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करना चाहता हूं और हिंदू समाज से एकजुट होकर इसकी रक्षा करने की अपील करता हूं।

विवाद की मुख्य वजह
यह विवाद मुख्य रूप से कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान पहाड़ी पर दीपक जलाने की जगह को लेकर है, जो दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक तेजी से बढ़ा। सदियों से (कम से कम 100 वर्षों से अधिक) दीपक मंदिर के निचले हिस्से में उच्ची पिल्लैयार मंदिर के पास दीपा मंडपम में जलाया जाता रहा है। लेकिन 2025 में हिंदू संगठनों, जैसे हिंदू मुनानी के सदस्य राम रविकुमार, ने मांग की कि इसे पहाड़ी की सबसे ऊंची जगह पर स्थित प्राचीन दीपथून (एक पत्थर का स्तंभ) पर जलाया जाए। यह स्थान सिकंदर बदुशाह दरगाह से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है, जिसके कारण विरोध उत्पन्न हुआ।
दरगाह प्रबंधन और कुछ मुस्लिम समुदायों का कहना है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं या उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। इससे पहले, 2025 में दरगाह पर पशु बलि पर रोक, पहाड़ी का नामकरण (Thiruparankundram Hill) और मालिकाना हक पर भी बहस हुई। कुछ दावों के अनुसार, पूरी पहाड़ी मंदिर की संपत्ति है और दरगाह एक अतिक्रमण है, जबकि ऐतिहासिक रूप से दोनों समुदाय सदियों से शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे हैं।
यह मुद्दा जल्दी राजनीतिक रंग ले चुका है। डीएमके सरकार पर हिंदू-विरोधी होने के आरोप लगे, जबकि विपक्षी दल जैसे बीजेपी और एआईएडीएमके ने इसे सनातन धर्म पर हमला बताया। कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर contempt proceedings भी चले। पुराने मुद्दों, जैसे पहाड़ी की मूल हिंदू संरचना की रक्षा, ने इस विवाद को और गहरा बनाया है।
मुख्य पक्ष और उनकी भूमिका
हिंदू पक्ष: हिंदू मुनानी, हिंदू धर्म परिषद, भक्तगण और याचिकाकर्ता जैसे राम रविकुमार तथा एम. अरसुपांडी। वे कोर्ट में याचिका दाखिल कर दीपथून पर दीप जलाने की मांग कर रहे हैं, इसे प्राचीन परंपरा बताते हुए।
मुस्लिम पक्ष: सिकंदर बदुशाह दरगाह प्रबंधन और वक्फ बोर्ड। वे दीपथून पर दीप जलाने का विरोध करते हैं, इसे अपने स्थान की निकटता के कारण अस्वीकार्य मानते हैं।
तमिलनाडु सरकार (डीएमके): एचआर एंड सीई विभाग, पुलिस और प्रशासन। उन्होंने कोर्ट के आदेशों पर अमल में देरी की, सेक्शन 144 जैसे प्रतिबंध लगाए और कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, जिससे contempt cases बने। सरकार का दावा है कि इससे शांति भंग हो सकती है।
कोर्ट की भूमिका: मद्रास हाई कोर्ट (जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन की सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच) ने हिंदू पक्ष के पक्ष में फैसला दिया, दीपथून पर दीप जलाने की अनुमति दी और कहा कि इससे किसी के अधिकार प्रभावित नहीं होते। जनवरी 2026 में डिवीजन बेंच ने इसे बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट में भी मामले लंबित हैं, जैसे एएसआई को पहाड़ी सौंपने की मांग।
राजनीतिक दल: बीजेपी नेता जैसे अनुराग ठाकुर ने सरकार को “एंटी-सनातन” कहा, जबकि डीएमके इसे सांप्रदायिक राजनीति बताता है। कुछ रिपोर्ट्स में हिंदू राइट-विंग ग्रुप्स को राजनीतिक फायदे के लिए दोषी ठहराया गया है।
वर्तमान स्थिति (फरवरी 2026 तक)
हाई कोर्ट ने दीपथून पर दीप जलाने की अनुमति दी है, लेकिन एएसआई और पुलिस से क्लियरेंस के साथ, तथा बिना बड़ी भीड़ के। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं, और विवाद मुख्य रूप से अदालती कार्रवाई में सिमट गया है।
मेरा हालिया दौरा और अपील
3 फरवरी 2026 को मैंने तिरुप्परंकुंड्रम मंदिर में भगवान मुरुगन के दर्शन किए। मंदिर के भव्य मंडपम में दीपा मंडपम क्षेत्र में विशेष पूजा-अर्चना का यह पल मेरे लिए अत्यंत भक्तिमय था। दर्शन के दौरान मुझे भगवान मुरुगन की तस्वीर प्राप्त हुई, और प्राचीन स्तंभों, चित्रित छतों तथा अन्य देवताओं की मूर्तियों के बीच खड़े होकर मैंने हिंदू धरोहर की मजबूती महसूस की।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब विवाद चरम पर है। पहाड़ी पर दरगाह के निर्माण और उसके प्रभाव से मैं गहरा दुखी हूं। यह स्थान भगवान मुरुगन का प्रथम आरुपदै वीडु है, जहां सुरपद्मन वध के बाद देवयानई से विवाह हुआ। सदियों पुरानी हिंदू परंपराएं, जैसे 24 घंटे दीप जलाना, यहां बनी रहनी चाहिए। किसी भी अतिक्रमण से हिंदू भावनाएं आहत होती हैं।
मैं वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन की ओर से मांग करता हूं कि पहाड़ी की मूल हिंदू संरचना और परंपराओं को पूरी तरह संरक्षित रखा जाए। हिंदू संगठनों से अपील है कि एकजुट होकर इस धरोहर की रक्षा करें। यह मुद्दा अब स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का है – सनातन धर्म की रक्षा के लिए हम सबको आगे आना चाहिए। कोर्ट के फैसलों का सख्ती से पालन हो, ताकि शांति और सद्भाव बना रहे।
जय भगवान मुरुगन! जय सनातन!
(लेखक वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष है)
