चित्रांगदा सिंह ने ‘मातृभूमि’ सॉन्ग में दिल छू लेने वाला असर छोड़ा, बैटल ऑफ गलवान को मिला इमोशनल सहारा
बैटल ऑफ गलवान के ‘मातृभूमि’ सॉन्ग में चमकीं चित्रांगदा सिंह, सादगी और मजबूती से जीता दिल
बैटल ऑफ गलवान: गरिमा, ताकत और भावना के साथ चित्रांगदा सिंह बनीं ‘मातृभूमि’ सॉन्ग की जान
सलमान खान की सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली फिल्म बैटल ऑफ गलवान के पहले गाने मातृभूमि में चित्रांगदा सिंह की मौजूदगी न सिर्फ आंखों को सुकून देती है, बल्कि दिल से भी जुड़ती है। शांत आत्मविश्वास और सादगी भरी खूबसूरती के साथ वह एक ऐसी भारतीय महिला की ताकत और गरिमा को दर्शाती हैं, जिसकी मजबूती बिना बोले ही महसूस हो जाती है। सादगी भरी साड़ियों में और बेहद सिंपल स्टाइल में नजर आ रहीं चित्रांगदा की मौजूदगी संस्कृति, परंपरा और अपनापन लिए हुए है, जो कहानी को गहराई और भावनात्मक मजबूती देती है।
सिर्फ दिखावे तक नहीं, उनका किरदार फिल्म का इमोशनल सेंटर बन जाता है। बिना ज़्यादा बोले, सधे हुए अंदाज़ में किया गया उनका अभिनय दर्शकों को ये महसूस कराता है कि जंग सिर्फ बॉर्डर पर नहीं लड़ी जाती, उसका असर घर और दिल तक महसूस होता है।
सलमान खान की कहानी कहने की सोच के मुताबिक मातृभूमि में महिला किरदार को पूरे सम्मान और अहमियत के साथ दिखाया गया है। चित्रांगदा सिंह को सिर्फ सजावटी किरदार की तरह नहीं रखा गया, बल्कि कहानी की भावनात्मक ताकत के रूप में पेश किया गया है। उनका अभिनय फिल्म की देशभक्ति की भावना को और मजबूत करता है, क्योंकि वह घर पर होने वाले उन खामोश बलिदानों को सामने लाती है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
यह गाना और उसमें चित्रांगदा का किरदार इस बात को और गहराई से सामने रखता है कि देशभक्ति सिर्फ बॉर्डर पर दिखने वाली बहादुरी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन लोगों की मजबूती में भी होती है जो घर पर इंतज़ार करते हैं, उम्मीद बनाए रखते हैं और हर हाल में डटे रहते हैं।
