उप मुख्यमंत्री अरुण साव निकले स्कूटी पर, शहर भ्रमण कर सफाई और निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण
Spread the loveसफाई व्यवस्था बेहतर करने और नियमित...
Spread the loveसफाई व्यवस्था बेहतर करने और नियमित...
Spread the love 50 सीटों के साथ इसी...
Spread the love– 1.22 करोड़ के कार्यों का...
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपने करियर में कई बेहतरीन और यादगार फिल्में दी हैं। उनकी फिल्मों को असरदार कहानी और दमदार अभिनय के लिए जाना जाता है। ऐसी ही एक फिल्म है रंग दे बसंती, जो दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए बस गई। आज से 20 साल पहले रिलीज़ हुई इस फिल्म ने सामाजिक सिनेमा और भारतीय फिल्मों की दिशा ही बदल दी थी। आमिर खान की सधी हुई लेकिन असरदार एक्टिंग, देशभक्ति से जुड़ी मजबूत कहानी और आज भी उतने ही प्रासंगिक विषयों के कारण रंग दे बसंती उनके करियर की सबसे अहम फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म के 20 साल पूरे होने पर, इसे देखने की ये हैं 5 खास वजहें—
आमिर खान की सधी हुई लेकिन गहरी छाप छोड़ने वाली एक्टिंग
फिल्म में आमिर खान का किरदार दलजीत ‘डीजे’ सिंह बेहद प्रभावशाली है। एक बेफिक्र और मस्ती भरी ज़िंदगी जीने वाले युवक से बदलाव की राह पर चलने वाले इंसान तक का उनका सफर फिल्म का भावनात्मक आधार है। डीजे का यह बदलाव बहुत सहज और संतुलित तरीके से दिखाया गया है। आमिर खान की शांत लेकिन ताकतवर अदाकारी दर्शकों के दिल को छू जाती है और लंबे समय तक याद रहती है।
देशभक्ति के मायने बदलने वाली मजबूत कहानी
रंग दे बसंती कुछ युवा दोस्तों की कहानी है, जो एक डॉक्यूमेंट्री में भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का किरदार निभाते हैं। जैसे-जैसे इतिहास वर्तमान से जुड़ता है, उनमें देशभक्ति की भावना जागती है। यह फिल्म सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी युवाओं को सोचने और सवाल उठाने के लिए प्रेरित करती है, और यह दिखाती है कि सच्ची देशभक्ति शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में होती है।
युवावस्था, दोस्ती और विद्रोह की सच्ची झलक
फिल्म ने युवाओं की मस्ती, दोस्तों के बीच की गहरी दोस्ती और उनके अंदर के संघर्ष को बहुत ईमानदारी से दिखाया है। दोस्तों के बीच के रिश्ते और भावनात्मक टकराव कहानी को असली और जुड़ाव भरा बनाते हैं। उनका विद्रोह बनावटी नहीं, बल्कि सच्ची भावना, सोच और बदलाव की चाह से पैदा होता है, जो दर्शकों से गहराई से जुड़ता है।
सदाबहार संगीत जो आज भी दिल को छूता है
ए.आर. रहमान का दिया गया रंग दे बसंती का संगीत आज भी उतना ही असरदार है। “रंग दे बसंती”, “लुका छुप्पी”, “खून चला”, “रूबरू” और “पाठशाला” जैसे गाने 20 साल बाद भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। ये गीत देशभक्ति, भावनाओं और यादों को आज भी ताज़ा कर देते हैं और हर पीढ़ी से जुड़ते हैं।
समय के साथ भी कम न हुई प्रासंगिकता
20 साल बाद भी रंग दे बसंती उतनी ही प्रासंगिक लगती है। सिस्टम पर सवाल उठाना, अन्याय के खिलाफ खड़े होना और अपनी ज़िम्मेदारी समझना—ये सभी बातें आज भी उतनी ही मायने रखती हैं। फिल्म यह याद दिलाती है कि असली बदलाव जागरूकता, हिम्मत और सामूहिक प्रयास से ही आता है।
