संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को रिलीज़ हुए आठ साल पूरे हो चुके हैं। आज भी यह फिल्म भंसाली की सबसे महत्वाकांक्षी और यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। पद्मावत को खास सिर्फ इसकी भव्यता और शानदार अभिनय ही नहीं बनाते, बल्कि यह भी कि यह फिल्म अचानक नहीं बनी। यह भंसाली का वह सपना था, जिसे उन्होंने एक दशक से भी ज़्यादा समय तक संजोकर रखा।
फिल्म के बड़े पर्दे पर आने से बहुत पहले ही संजय लीला भंसाली रानी पद्मावती की ऐतिहासिक कहानी से प्रभावित थे। गुरु दत्त और राज कपूर जैसे दिग्गज फिल्मकारों से तुलना किए जाने वाले भंसाली ने इस कहानी से सबसे पहले थिएटर के ज़रिए जुड़ाव बनाया। साल 2008 में उन्होंने पेरिस में इसी कहानी पर आधारित एक भव्य ओपेरा का निर्देशन किया था, जिसमें हाथी और विशाल मंच सज्जा शामिल थी। उस समय फिल्म की योजना भी नहीं बनी थी, लेकिन यहीं से पद्मावत की शुरुआत हुई।
जब 2018 में पद्मावत सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई, तो यह कोई साधारण फिल्म नहीं थी, बल्कि भंसाली के वर्षों पुराने विज़न का नतीजा थी। कला निर्देशन, कोरियोग्राफी, संगीत और अभिनय पर उनकी बारीकी ने सदियों पुरानी कविता को एक जीवंत और सांस लेती हुई सिनेमा की दुनिया में बदल दिया। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि दर्शकों को वीरता, सुंदरता और ऐतिहासिक गौरव के दौर में ले गई।
बॉक्स ऑफिस पर सफलता के अलावा, पद्मावत ने भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया। इस फिल्म ने साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने के लिए अपनी सांस्कृतिक पहचान को हल्का करने की ज़रूरत नहीं है। सच्ची और निडर कहानी, जब दमदार कारीगरी के साथ पेश की जाए, तो वह हर जगह लोगों से जुड़ती है।आठ साल बाद, पद्मावत सिर्फ एक फिल्म की सालगिरह नहीं, बल्कि दूरदर्शी फिल्ममेकिंग का जश्न है। संजय लीला भंसाली का अपने काम के प्रति समर्पण आज भी नई पीढ़ी के कहानीकारों को प्रेरित करता है और यह साबित करता है कि दिल, विरासत और भव्यता से भरी सिनेमा की कोई सरहद नहीं होती।काम की बात करें तो संजय लीला भंसाली अपनी अगली निर्देशित फिल्म लव एंड वॉर की तैयारी कर रहे हैं, जिसे 2026 की सबसे बड़ी फिल्म बताया जा रहा है। इस फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विक्की कौशल मुख्य भूमिकाओं में नज़र आएंगे।
