*इंदौर, 13 नवम्बर 2025।* प्रसिद्ध एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संदीप जुल्का और उनकी टीम ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से इंदौर में एक विशेष जनस्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा जनजागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों में डायबिटीज़ (मधुमेह) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच की आदत को प्रोत्साहित करना और साथ ही सड़क सुरक्षा के नियमों का महत्व समझाना था।कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार 11 नवम्बर 2025 को देवास नाका से राऊ के बीच स्थित 6 चयनित पेट्रोल पंपों पर किया गया, जहाँ सुबह 9 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक वॉलंटियर द्वारा आमजन के रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट किए गए। इस दौरान 500 से ज्यादा लोगों की शुगर जांच की गई। जांच में हर पाँच में से एक व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से बड़ी हुई पाई गई, जबकि हर दस में से एक को डायबिटीज पाई गई, दस में से दो लोग इस बात से अनजान थे कि उन्हें डायबिटीज हो सकती हैं। ये आंकड़े इस दिशा में समाज में फैली अनभिज्ञता को दिखाते हैं। अधिकतर लोग नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं कराते और तभी परीक्षण करवाते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
यह अभियान केवल स्वास्थ्य परीक्षण तक सीमित नहीं रहा। डॉ. जुल्का की टीम ने इस अवसर को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी उपयोग किया। पेट्रोल पंपों पर आने वाले वाहन चालकों, रिक्शा चालकों और नागरिकों को हेलमेट पहनने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सड़क पर सतर्क रहने की सलाह दी गई। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी शुगर रिपोर्ट कार्ड दी गई, जिसके पीछे सड़क सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण संदेश और ट्रैफिक नियमों की जानकारी अंकित थी, ताकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षा के प्रति भी जिम्मेदार बने।
इस अवसर पर डॉ. संदीप जुल्का ने कहा, “डायबिटीज़ को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हमारे शरीर को धीरे-धीरे प्रभावित करती रहती है। हमारे अभियान के दौरान यह देखकर चिंता हुई कि हर पाँच में से एक व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से बड़ी हुई पाई गई और उनमें से कई को अपनी स्थिति की जानकारी भी नहीं थी। यह आंकड़ा बताता है कि हमें अब केवल इलाज नहीं, बल्कि समय पर जांच और जागरूकता को प्राथमिकता देनी होगी। हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में स्वास्थ्य जांच को उतनी ही गंभीरता से शामिल करना चाहिए जितनी से हम रोज़मर्रा के अन्य कार्य करते हैं।बीस वर्ष से ज्याद उम्र के व्यक्ति को वर्ष में एक बार शुगर टेस्ट करवाना कोई कठिन कार्य नहीं है, लेकिन यह आपकी आने वाली ज़िंदगी को सुरक्षित कर सकता है। हमारा उद्देश्य केवल जांच करना नहीं था, बल्कि यह समझाना था कि ‘स्वास्थ्य’ और ‘सुरक्षा’ दोनों जीवन के अभिन्न अंग हैं। जैसे सड़क पर सावधानी बरतना हमें दुर्घटनाओं से बचाता है, वैसे ही नियमित जांच हमें बीमारियों से बचा सकती है। एक सजग नागरिक वही है जो अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों की जिम्मेदारी स्वयं लेता है। इस अभियान के ज़रिए हम यही संदेश देना चाहते हैं कि बदलाव सरकारों या डॉक्टरों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जागरूकता से शुरू होता है। जब हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनेगा, तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में आगे बढ़ पाएंगेl
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