इंदौर, 3 नवम्बर 2025: विशेष जुपिटर हॉस्पिटल ने जुपिटर मैराथन इंदौर 2025 की घोषणा की है, जो 30 नवम्बर 2025 को आयोजित की जाएगी। इस मैराथन का उद्देश्य कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, ताकि समाज एक कैंसर-मुक्त और स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सके।मुंबई (ठाणे) में आयोजित तीन सफल संस्करणों में 8,000 से अधिक रनर्स की भागीदारी के बाद, अब यह मैराथन इंदौर में आयोजित की जा रही है। इस साल की थीम — “Together We Race for a Cancer-Free Tomorrow” — इंदौर वासियों के जोश और जागरूकता को एक मंच पर लाने का प्रयास है।जुपिटर मैराथन – इंदौर में 5 किमी, 10 किमी और 21 किमी की रन कैटेगरी होंगी, जो देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) से शुरू होंगी। इस वर्ष लगभग 3,500 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें कॉर्पोरेट्स, फिटनेस ग्रुप्स, सशस्त्र बलों के सदस्य और इंदौर की आम जनता शामिल है।इस बार, कैंसर सर्वाइवर्स के लिए एक विशेष 1 किमी रन का आयोजन भी किया जाएगा।
मैराथन के लिए रजिस्ट्रेशन Townscript, India Running, BookMyShow और District पर खुले हैं |
इस अवसर पर डॉ. राजेश कासलीवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, विशेष जुपिटर हॉस्पिटल ने कहा – “विशेष जुपिटर में हम मानते हैं कि जागरूकता और रोकथाम, कैंसर से जीत की सबसे बड़ी कुंजी हैं। यह मैराथन सिर्फ एक दौड़ नहीं, बल्कि बदलाव की दिशा में एक कदम है।”इस मैराथन की घोषणा 3 नवम्बर को विशेष जुपिटर हॉस्पिटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जिसमें अस्पताल की कैंसर टीम के वरिष्ठ डॉक्टर उपस्थित रहे।
कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक अग्रवाल (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. अश्विन रंगोले (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, रोबोटिक एवं HIPEC सर्जन), डॉ. तनुज श्रीवास्तव (सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) और डॉ. अभिषेक लड्डा (यूरोलॉजी एवं यूरो ऑन्कोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांटेशन) शामिल थे। रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिद्धा (रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट), मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आकाश तिवारी (मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट) तथा हेमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विनय कुमार बोहरा (हेमेटोलॉजिस्ट एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट फिजिशियन) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान मैराथन की आधिकारिक टी-शर्ट का अनावरण (रिवील) भी किया गया, सभी विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से यह संदेश दिया कि कैंसर का शीघ्र निदान, समय पर उपचार और जन-जागरूकता ही कैंसर-मुक्त समाज की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
