इंदौर, : मध्यप्रदेश में हृदय रोग तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। गर्मियों 2024 से अब तक प्रदेश में कार्डियक इमरजेंसी पाँच गुना तक बढ़ी है और सात महीनों में 15,000 से अधिक मामलों में आपातकालीन सेवाओं को दखल देना पड़ा। गैर-संचारी रोगों में इस्कीमिक हृदय रोग मृत्यु और अपंगता का सबसे बड़ा कारण है और प्रदेश की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रहा है।
सर्वेक्षणों के अनुसार, मध्यप्रदेश के 22.3% वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, 15.3% मोटापे या अधिक वजन से जूझ रहे हैं और 6.8% मधुमेह से प्रभावित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 11% वयस्क आबादी को हृदय संबंधी बीमारियाँ हैं, लेकिन आईसीएमआर की रिपोर्ट बताती है कि इनमें सबसे अधिक बोझ मध्यप्रदेश में है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के जिन 100 जिलों में सबसे अधिक ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उनमें से 15 जिले अकेले मध्यप्रदेश के हैं।
इस गंभीर स्थिति में इंदौर विशेष चिंता का केंद्र है। देश की “फूड कैपिटल” कही जाने वाली इस शहर की पहचान पोहा-जलेबी, सराफा और छप्पन दुकान जैसे पकवानों से है। यहाँ की संस्कृति खाने-पीने के इर्द-गिर्द घूमती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यही स्वाद अब दिल को बीमार बना रहा है।
“इंदौर एक ऐसा शहर है जो खाने पर जीता है। देसी घी की जलेबी हो या त्योहारों की थाली, यह हमारी पहचान है। लेकिन वही स्वाद जब शरीर में संतुलन के बिना जाता है तो दिल पर बोझ डालता है,” कहते हैं डॉ. राकेश जैन, डीएम कार्डियोलॉजी, गीता भवन स्क्वायर, इंदौर। उन्होंने कहा, “आज मैं 30 साल के युवाओं को ब्लॉकेज और हाई ब्लड प्रेशर के साथ देख रहा हूँ। वजह सिर्फ खाना नहीं है, बल्कि यह है कि खाने के साथ मेहनत और हरकत खत्म हो गई है। हमारे दादा-दादी भी घी और मिठाई खाते थे, लेकिन वे चलते-फिरते ज़्यादा थे, खेतों और काम में शरीरिक मेहनत करते थे और जीवन की रफ्तार धीमी थी। आज का इंदौर उतना ही खाता है, लेकिन दिनभर बैठा रहता है—यह दिल के लिए बेहद खतरनाक मेल है। योग और व्यायाम अब शौक नहीं रहे, बल्कि जीवन की अनिवार्यता हैं।”
डॉ. जैन का मानना है कि सिर्फ रोज़ाना 30 से 40 मिनट तेज़ चलना, साइकिल चलाना या योग करना हृदय रोग का खतरा बहुत हद तक कम कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्राणायाम, ताड़ासन, भुजंगासन और शवासन जैसे योगासन तनाव कम करते हैं, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं और रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं। उनका कहना है, “व्यायाम एकमात्र दवा है जिसे आप रोज़ खुद के लिए लिख सकते हैं और जिसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। यह आपको इंदौर की खानपान संस्कृति का आनंद लेने देता है, लेकिन दिल को बिगाड़ता नहीं। संदेश साफ है—जैसे आप भोजन नहीं छोड़ते, वैसे ही व्यायाम भी मत छोड़िए।”
विश्व हृदय दिवस पर डॉ. जैन ने इंदौरवासियों से अपील की कि वे स्वाद और सेहत के बीच संतुलन बनाएं। उन्होंने कहा, “भोजन आनंद है, लेकिन स्वास्थ्य जीवन है। हम इंदौर की पहचान को ‘फूड सिटी’ से ‘हार्ट प्रॉब्लम सिटी’ बनने नहीं दे सकते। राजवाड़ा में सुबह की सैर, पिपल्यापाला झील पर साइकिल चलाना और पार्कों में योग समूहों से जुड़ना शुरू करें। मज़बूत दिल ही यह सुनिश्चित करेगा कि इंदौर आने वाली पीढ़ियों तक खाने का जश्न मनाता रहे, न कि समय से पहले मौतों पर शोक मनाए।”
