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नई दिल्ली,। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत दुनियाभर के 30 से ज्यादा देशों के मंत्रियों के साथ तकनीकी और कानूनी उपायों पर चर्चा कर रहा है, ताकि मीडिया में एआई के दुरुपयोग को रोका जा सके। नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि विश्वास के बिना नवाचार एक बोझ बन जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एआई निर्मित सामग्री के लिए कड़े नियम बना रही है, जिनमें जल-चिह्न और स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि मानव सृजनात्मकता की प्रामाणिकता सुरक्षित रहे। उन्होंने यह बातें सत्र के दौरान कहीं, जिसमें चार्ल्स रिव्किन, मोशन पिक्चर एसोसिएशन के चेयरमैन और सीईओ भी शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वैष्णव ने कहा कि गलत सूचना, भ्रामक सामग्री और डीपफेक तकनीक समाज की नींव पर हमला कर रही है। इसके खिलाफ जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एआई मॉडल और सामग्री निर्माता सभी की है। उन्होंने साफ किया कि इन उपकरणों का दुरुपयोग रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह परिवार, सामाजिक पहचान और प्रशासनिक संस्थाओं के बीच विश्वास को प्रभावित कर रहा है। नई तकनीक को इस तरह इस्तेमाल करना होगा कि यह विश्वास को बढ़ाए, न कि संस्थाओं को कमजोर करे। मंत्री वैष्णव ने आगे कहा कि स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का अधिकार भी विश्वास पर आधारित है और इस विश्वास की रक्षा करना जरुरी है। उन्होंने यह भी कहा कि डीपफेक और डेटा चोरी जैसी घटनाएं पूरे देश और समाज के लिए गैर-वार्तालापीय रूप से गंभीर है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे एआई निर्मित सामग्री की पहचान और नियंत्रण के लिए प्रभावी प्रणाली विकसित करें। इसके तहत यह तय किया जाना है कि एआई द्वारा बनाई गई सामग्री स्पष्ट रूप से लेबल की गई हो और इसमें यह संकेत हो कि यह कृत्रिम रूप से बनाई गई है। यह कदम अवैध, यौन शोषण संबंधी या भ्रामक सामग्री को रोकने के लिए उठाया गया है।
