*राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई ठप, अस्पताल सील होने के बाद भी चालू*
नलखेड़ा – क्षेत्र में सक्रिय झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही साफ झलक रही है। मुख्यमंत्री के आदेशों और मीडिया में लगातार उठ रही खबरों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
*राजनीतिक गठजोड़ बना सुरक्षा कवच*
झोलाछाप डॉक्टरों का सिंडिकेट इतना मजबूत है कि सत्ताधारी दल के विधायक और मंत्री जब भी क्षेत्र में आते हैं, तो ये लोग स्वागत के लिए कतार में खड़े दिखाई देते हैं। जिसका प्रचार प्रसार सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाता है।राजनीतिक संरक्षण का असर यह है कि अधिकारी कार्रवाई करने से बचते हैं।
सूत्रों के अनुसार, खबरों के प्रकाशन के बाद किसी जिम्मेदार अधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कार्रवाई की जाए। बावजूद झोलाछाप डॉक्टरो के संगठन के लोगों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की साठ गाठ के चलते कार्यवाही नहीं हो पाई।
*लक्ष्य हॉस्पिटल का मामला*
पूर्व में लक्ष्य हॉस्पिटल को स्वास्थ्य विभाग ने सील किया था, सील होने के बाद भी हॉस्पिटल संचालक दामू विश्वकर्मा के द्वारा लगभग 40 बेड का अस्पताल खुलेआम संचालित किया जा रहा है। यहां छोटे-मोटे ऑपरेशन से लेकर डिलीवरी तक कराई जा रही है।
प्रश्न उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं?
*आखिर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई का इंतजार कर रहा है या किसी मौत का?*
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी तब तक कार्रवाई नहीं करेंगे, जब तक किसी की जान न चली जाए।
अब सवाल यह है कि, क्या सरकार के आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह जाएंगे या फिर जनता की जान से जुड़े इस गंभीर मामले पर कड़ी कार्रवाई होगी?
