कुंडालिया बांध परियोजना के पुनर्वास घोटाले में लोकायुक्त द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार पारस वैश्य ने लगाई थी याचिका
नलखेड़ा। कुंडलिया वृहद बांध परियोजना के पुनर्वास राशि वितरण मामले में हुए घोटाले को लेकर लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा 09 शासकीय कर्मचारियों के सहित अन्य 107 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं 420 सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जिसको लेकर नलखेड़ा के तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार पारस वैश्य के द्वारा उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के समक्ष लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के लिए विविध अपराधिक याचिका प्रस्तुत की गई थी। न्यायालय के द्वारा याचिका गुण दोष से रहित होने के कारण निरस्त कर दी गई है।
मामला है नलखेड़ा तहसील का ग्राम भंडावद का जहाँ कुंडालिया बांध परियोजना का क्रियान्वयन किया जाना था और प्रभावित परिवारों को प्रति वयस्क सदस्य को मुआवजा राशि देने की घोषणा की गई थी। ग्राम भंडावद से, जिन्होंने भूखंड आवंटन से इनकार कर दिया था। दावेदारों ने अपने दावा आवेदन कलेक्टर आगर मालवा को प्रस्तुत किए थे, जिन्हें फिर भूमि अधिग्रहण अधिकारी को भेज दिया गया था। जिसमें एक समिति का गठन किया गया था, जो दावेदारों की जन्मतिथि और वैवाहिक स्थिति का सत्यापन किया गया था। जिसको लेकर शिकायतकर्ता के द्वारा विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त उज्जैन को एक शिकायत की गई थी कि कुण्डालिया बांध परियोजना में ग्राम भण्डावद की फाईलें जिसमें वयस्क व्यक्ति को प्लॉट के बदले 05 लाख रूपए प्रदान किए जाने का प्रावधान है, उक्त प्रावधान का दुरूपयोग करते हुए ग्राम भण्डावद की फाईलों में एडीएम,एसडीएम,तहसीलदार, कुण्डालिया बांध परियोजना अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी,राजस्व निरीक्षक, पटवारी, उपयंत्री, प्रबंधक, कुण्डालिया परियोजना राजगढ, भू-अर्जन अधिकारी के लिपिक आदि ने अपने पद का दुरूपयोग कर 49 लोगों की फाईलों में अवैध रूप से अपात्र व्यक्तियों को लाभ दिया जाकर शासन को करोडों रूपए का नुकसान पहुंचाया है।उक्त शिकायती आवेदन की जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा तत्कालीन तहसीलदार पारस वेश्य सहित 9 लोक सेवक एवं अन्य 98 लोगों के विरुद्ध 5 मार्च 2025 को अपराध क्रमांक 45/2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं (संशोधन -अधिनियम 2018) की धारा 7 (ग),भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं (संशोधन -अधिनियम 2018) की धारा 13(1)(a),
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं (संशोधन -अधिनियम 2018) की धारा 13(2), भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 409,420, 467, 468,
471,120-B के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। उक्त दर्ज प्राथमिकी रद्द करने को लेकर नलखेड़ा के तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार पारस वैश्य के द्वारा उच्च न्यायालय की खंडपीठ इंदौर के समक्ष एक विविध आपराधिक याचिका क्र. 30115/25 पारस वैश्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य 21 जुलाई को प्रस्तुत की गई थी उक्त याचिका को न्यायलय के द्वारा आदेश में यह माना गया कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि आवेदक पारस वैश्य तहसील नलखेड़ा, आगर मालवा में प्रभारी तहसीलदार के रूप में कार्यरत था जब मुआवजा राशि प्राप्त करने के पात्र व्यक्तियों की साख सत्यापित करने का आदेश दिया गया था और रिपोर्ट आवेदक तहसीलदार पारस वैश्य को प्रस्तुत की गई थी। लोकायुक्त के कानूनी सलाहकार द्वारा की गई जाँच के आधार पर न केवल प्राथमिकी दर्ज की गई, बल्कि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और उसके बाद आवेदक तहसीलदार पारस वेश्य और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। लाभार्थियों के चयन में हुई गंभीर अनियमितताओं को दर्शाने के लिए गवाहों के बयान और दस्तावेज़ों के रूप में साक्ष्य रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं। आवेदक प्रभारी तहसीलदार पारस वैश्य की भूमिका से ऐसा प्रतीत होता है कि मामला पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है। यह ऐसा मामला नहीं है कि, जहाँ आवेदक तहसीलदार पारस वैश्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग हो। इस कारण से याचिका गुण दोष से रहित होने के कारण निरस्त की गई है।
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार पारस वैश्य पिता राजाराम वैश्य निवासी ऋषि नगर उज्जैन के द्वारा न्यायालय- विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,आगर- मालवा के समक्ष अग्रिम जमानती आवेदन प्रस्तुत किया गया था। जो केस संख्या बी. ए. 63/2025 के आदेश दिनांक 21/03/25 से निरस्त किया गया है। बाद भी लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा आरोपी तहसीलदार पारस वैश्य को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। जो लोकायुक्त पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर रहा है।
लोकायुक्त विभाग प्रकरण दर्ज कर भूला
विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त पुलिस उज्जैन के द्वारा 5 मार्च 2025 को पारस वैश्य सहित नो लोक सेवकों एवं अन्य 98 लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था लेकिन प्रकरण के 5 माह बाद भी लोकायुक्त द्वारा उक्त आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वे सभी अपने पदों पर पदस्थ रहकर जांच को प्रभावित कर रहे हैं लोकायुक्त पुलिस को चाहिए कि उक्त प्रकरण में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्यवाही करना चाहिए।
