इंदौर: भगवान नेमीनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर आज नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन श्वे.मन्दिर गुमाश्तानगर में नेमीनाथ भगवान के पांचो कल्याणक (च्यवन ,जन्म, दीक्षा , केवलज्ञान और निर्वाण (मोक्ष) का वर्णन करते हुए एक बहुत ही सुन्दर नाटिका का मंचन किया गया ।यह सम्पूर्ण नाटिका प.पू.शुद्धि प्रसन्ना श्री जी और उनकी शिष्या प्रवृद्धि श्री जी , समृद्धि श्री के मार्गदर्शन में संपन्न हुई !
इन्द्र का आसन डोलायमान होता है,इंद्र अवधिज्ञान से देखते हैं की धरती लोक में तीर्थंकर नेमीनाथ प्रभु का माता शिवादेवी के गर्भ में अवतरण हुआ है, इधर मध्य रात्रि में शिवादेवी ने चौदह स्वप्न देखे जिसमें गज , वृषभ,केसरी सिंह, लक्ष्मी जी ,पुष्प की माला, शशी,रवि , ध्वजा , प्ररण कलश , पद्म सरोवर , रत्न राशि, भुवन विमान , रत्नाकर और निर्धुम अग्नि।
सुबह इसकी जानकारी शिवादेवी ने अपने पति को दी तब उन्होंने राज ज्योतिषाचार्य को बुलाकर इन स्वप्नों का महत्व समझा ! तभी प्रियवंदा ( दासी)का झूमते -झूमते आगमन होता है , राजन की जय हो-क्या समाचार है राजन जानना चाहते हैं बहुत सारी बातें करने के बाद प्रियवंदा बताती है कि बिना कष्ट के, सुखपूर्वक , तीन लोक में उत्तम , सर्वश्रेष्ठ,सुंदर , कल्याणकारी ऐसे पुरुषोत्तम , नर केसरी , गंध हस्ती की तरह देव भी जिनके रूप को देखकर शर्मा जाए ऐसे देदीप्यमान तीन लोक को अभय देने वाले , चक्षु देने वाले ,मार्ग देने वाले सुंदर सलोने , सभी को रिझाने वाले पुत्र का जन्म हुआ है! पुत्र जन्म का समाचार सुनकर राजा बहुत प्रसन्न होते हुए मंत्री कों कहते है कि पूरे नगर को नव-वधू की तरह सजा दो, कारागृह से बंदियों को मुक्त कर दो, जिनालय में महोत्सव का आयोजन करो , दान की गंगा बहा दो मेरे बाल प्रभु का जन्म हुआ है ! आगे अरिष्ठनेमि युवा होते हैं तब उन्होंने एक दिन श्रीकृष्ण का पाँच जन्य नामक शंख कुतूहल पूर्वक बजा दिया तब श्रीकृष्ण को भय हुआ कि नेमीकुमार मुझसे ज़्यादा बलवान है इसलिए इसकी शादी हो जाए तो इसका बल कम हो जाएगा और मेरी सत्ता बनी रहेगी यही सोचकर श्रीकृष्ण ने नेमीकुमार का विवाह मथुरा के राजा उग्रसेन की पुत्री राजीमती के साथ तय करा दिया । उग्रसेन की दुलारी राजुल अपने कक्ष में विचारों में लीन हो जाती है ! उसकी सखियाँ उसको छेड़कर मस्ती करती है ! तभी सखियाँ कहती है देखो-देखो नेमीकुमार की बारात आ रही है । राजुल कक्ष में बैठी हुई है वह भी अपने प्रियतम को देखने के लिए लालायित है ! नेमकुमार पशुओं का करुण स्वर सुनकर रुक जाते है और सारथी से पूछते है यह स्वर कहाँ से सुनाई दे रहे है सारथी ने कहा “ हे भगवन क्या आप नहीं जानते कि आपके विवाह में आए हुए अतिथियों के भोजन हेतु इनका वध किया जाएगा और नेमकुमार त्राहिमान-त्राहिमान कहने लगते है ! सभी पशुओं को मुक्त कराकर अपना रथ को गिरनार की और मोड़ने की आज्ञा दी ! चारों ओर हाहाकार मच गया दोनों परिवार दुखी हो गए ! समुद्र विजय तो मूर्छित हो गए । तब नेमीकुमार अनेक कर्म संबंधी बाते बतलाते हुए “ *संयम बिना मुक्ति नहीं* “ बोलते हुए नेमि प्रस्थान कर जाते है !
राजुल को जब यह समाचार मिलता है तो वह भी मूर्छित हो जाती है, सखियाँ उसे समझाती हैं कि तुम्हारा उससे संबंध ही क्या है ? न उसने तुम्हारा हाथ पकड़ा है न सप्तपदी पढ़ी है । तब राजुल कहती हैं मैंने उन्हें मन से अर्पण कर दिया है और अर्पण की हुई वस्तु वापस नहीं ली जा सकती ! उन्होंने आज मेरा ग्रहण करने से मुँह मोड़ा है परन्तु मस्तक पर वासक्षेप डालने के लिए उनका हाथ ज़रूर बढ़ेगा ! यह कहकर राजुल अपना श्रृंगार और गहनों का त्यागकर परमात्मा के ध्यान में लीन हो जाती है !
प्रभु नेमिनाथ एक वर्ष तक वर्षीदान देते हैं, वर्षीदान समाप्त होने पर दीक्षा लेते है , इंद्रादि देवों ने आकर प्रभु का दीक्षा कल्याणक किया ! आगे चलकर आपने बेंत वृक्ष के नीचे तेला करके काऊसग किया आसोज वादी अमावस्या की रात को चित्रा नक्षत्र में केवल ज्ञान प्राप्त हुआ ! इंद्रादि देवों ने आकर केवलज्ञान कल्याणक मनाने के लिए समवसरण की रचना की प्रभु ने समवसरण में देशना दी और धर्म की स्थापना की । निर्वाणकाल समीप जान प्रभु रेवतगिरी ( गिरनार ) पर गए और वहाँ 536 साधुओ के साथ पादोपगमन अनशन पर आषाढ़ शुक्ला 8 के दिन चित्रा नक्षत्र में मोक्ष गए !
नेमीनाथ की जय बोलकर नाटिका समाप्त हुई !
आज की नाटिका में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य महेन्द्रजी सुमनजी सुराणा ने लिया , इन्द्र-इंद्राणी की भूमिका अरुण-संध्या पोरवाल ने निभाई !दासी का किरदार दिव्या छजलानी ने और राजुल का किरदार करिश्मा पुंगलीया ने बहुत ही सुंदर ढंग से निभाया !राज ज्योतिषाचार्य की भूमिका हर्ष ने निभाई ! कार्यक्रम में संगीत बड़ौद निवासी आयुष और हर्ष ने दिया इसके अतिरिक्त तनीष ,वीर,अर्हम, नीरव, हिमांशु , मानस ने भी अपनी भूमिका से दर्शकों को प्रभावित किया , नाटिका का संचालन टोंकखुर्द ( देवास)निवासी दर्शिता व पूजा ने किया ! आज के कार्यक्रम में लाभचंद सुराणा ,प्रोफेसर सतीश चोपड़ा , सुधीर सेठिया , भूपेन्द्र जैन ,अशोक तातेड़,मनोज रांका, अनिल बोहरा , प्रदीप पोरवाल , डाक्टर नवीन जैन ,हसमुख पोरवाल सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे