मै और मेरा परिवार एक साथ है : प.पू. प्रवृद्धि श्री जी
प्रो. सतीश चोपड़ा
नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन श्वे. मंदिर गुमाश्ता नगर में मै और मेरा परिवार विषय पर बोलते हुए प्रवृद्धि श्री जी ने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों को ऐसा महसूस होना चाहिए की संकट और किसी समस्या के समय मैं और मेरा परिवार एक साथ है । वर्तमान परिवेश में परिवार में कई परिवर्तन हो रहे है , परिवर्तन हमेशा आगे की ओर ले जाते है, लेकिन कुछ परिवर्तन पारिवारिक पतन के कारण भी बनते है ,यदि हमने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो कहीं ऐसा न हो कि जिनकी दादी घर में गरम पानी पीती थी, आज उनकी पोती बियर बार में बैठकर बियर पी रही हो ।
आगे आपने कहा कि कारपेट कितना भी छोटा हो लेकिन उस पर बैठने वालो का मेला हो । परमात्मा से पुराने संबंध तोड़कर हमे नए संबंध नहीं बनाना चाहिए , हृदय विशाल है तो रिश्ते बने रहेंगे । जो माता-पिता अपने बच्चों को सही मार्ग नहीं दिखा सकते उन्हें शास्त्रों में चण्डाल कहते है । आपने जैन समाज में बढ़ती हुई तलाक और घटती हुई जन्म दर पर चिंता ज़ाहिर करते हुए आपने कहा कि युवा पीढ़ी को समझाने का प्रयास करना चाहिए नहीं तो यह समस्या परिवार , समाज व कई सामाजिक संबंधों को समाप्त कर देगी । परिवार के वृद्ध सदस्यों के सम्मान में कमी पर भी आपने चिंता करते हुए कहा कि वे परिवार के आदर्श है उनका सम्मान का ध्यान रखना चाहिए । लड़कियों के तन पर से घटते हुए कपड़ों पर कहा की ऐसे कपड़े किस काम के जो दूसरों की आँखो में विकार उत्पन्न कर दे , हम मंदिर में विकार कम करने के लिए आते है कहीं हम ही उसके निमित न बन बेठे । आपने फेमेली के छे शब्दो की अर्थ और उदारहण सहित चर्चा कर वर्तमान की वास्तविकता से परिचय कराकर लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए , धर्म सभा में बैठे हुए कई लोगों की आखें इस वास्तविकता को सुनकर डबडबा आई । इस अवसर पर शुद्धिप्रसन्ना श्री जी अपनी शिष्या की ओजस्वी वाणी का श्रवण कर रही थी । आज की धर्मसभा में सुधीर सेठिया , प्रोफेसर सतीश चोपड़ा , भूपेन्द्र जैन , प्रकाश नाहर , मनोज रांका सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविका उपस्थित थे !