भोपाल, मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में स्थित नागद्वार मंदिर के दर्शन के लिए वार्षिक यात्रा शनिवार, 19 जुलाई से शुरू हो चुकी है। यह मंदिर साल में केवल 10 दिनों के लिए ही खुलता है। यात्रा की शुरुआत जलगली से होती है और श्रद्धालुओं को 13-14 किलोमीटर लंबी और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी यात्रा तय करनी होती है। यह यात्रा सतपुड़ा की घनी पहाड़ियों, नदियों और झरनों के बीच से होकर गुजरती है। 7 ऊंची-नीची पहाड़ियों को पार कर श्रद्धालु नागद्वार मंदिर पहुंचते हैं। इस साल करीब 5 से 6 लाख श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। नागद्वार: नागराज की दुनिया नागद्वार मंदिर को ‘नागराज की दुनिया’ भी कहा जाता है। यह यात्रा श्रावण मास में नागपंचमी के अवसर पर होती है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि यहां कालसर्प दोष दूर होता है। पौराणिक कथाएं इस मंदिर से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं हैं— पहली कथा के अनुसार, भगवान शिव भस्मासुर से बचने के लिए नागराज को नागद्वारी में छोड़कर चौरागढ़ चले गए थे। दूसरी कथा में एक महिला ने पुत्र प्राप्ति के लिए नागराज को काजल लगाने की मन्नत मांगी थी। नागराज ने विशाल रूप के बजाय छोटा रूप धारण कर उसे दर्शन दिए। श्रद्धा और भक्ति का संगम यात्रा के दौरान भक्त ‘हर-हर महादेव’, ‘हर भोला’ जैसे जयकारों के साथ आगे बढ़ते हैं। नागद्वारी यात्रा के प्रमुख पड़ावों में स्वर्गद्वार भी शामिल है, जहां दो पहाड़ियों के बीच सीढ़ियां लगाई गई हैं। पचमढ़ी के आसपास के अन्य धार्मिक स्थलों में जटाशंकर, गुप्त महादेव, चौरागढ़, बड़ा महादेव आदि शामिल हैं। महाशिवरात्रि पर चौरागढ़ और श्रावण में नागद्वार मेले का आयोजन होता है, जो हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
