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• हर तरीक़ा हर मरीज की ख़ास शारीरिक बनावट के हिसाब से तैयार किया जाता है, और इसमें उपचार की एक विशेष विधि अपनाई जाती है
• हर तरीक़े को मरीज की उम्र और कुल मिलाकर उसकी सेहत, हार्ट में ब्लॉकेज की जगह और संख्या के साथ-साथ अन्य बीमारियों के आधार पर बेहतर परिणाम देने के लिए तैयार किया गया है
अहमदाबाद: दिनांक: 13 जुलाई, 2025: – डॉ. धीरेन शाह, सीनियर कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन दिल से संबंधित हर तरह की बीमारी के उपचार के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम हैं, और वे बड़े गर्व के साथ कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की सात उन्नत तकनीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें से हर तकनीक को मरीजों की खास शारीरिक और चिकित्सकीय ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बड़ी सावधानी से तैयार किया गया है। सर्जरी के ये नए तरीके निजी ज़रूरतों के अनुरूप उपचार, सर्जरी में सटीकता और मरीजों की सुरक्षा के अटल इरादे को दर्शाते हैं। कार्डियक साइंसेज के तहत ये सभी सर्जिकल प्रक्रियाएँ मैरिंगो सीआईएमएस हॉस्पिटल में विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा की जाती है, जिनकी कमान डॉ. धीरेन शाह के हाथों में हैं। यहाँ की जाने वाली सर्जिकल प्रक्रियाओं में बीटिंग हार्ट सर्जरी, बाइलेटरल इंटरनल मैमेरी आर्टरीज़ (BIMA), मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS), रोबोटिक कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी, हाइब्रिड कोरोनरी बाईपास सर्जरी, और हार्ट फेल्योर में बाईपास सर्जरी शामिल हैं।
डॉ. धीरेन शाह अस्पताल में भर्ती मरीजों की देखभाल में बाईपास सर्जरी के अलग-अलग तरीकों के उपयोग को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहते हैं कि, “हम मरीज की चिकित्सीय स्थिति और कुल मिलाकर उसकी सेहत को ध्यान में रखकर सबसे उपयुक्त तरीका चुनते हैं, ताकि हमें बेहतर नतीजे प्राप्त हों और मरीज जल्दी ठीक हों। मैं और मेरी टीम लगातार मरीजों पर केंद्रित कार्डियक इनोवेशन में सबसे आगे रहने की कोशिश करते हैं, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को हमदर्दी के साथ देखभाल से जोड़ते हैं, और विश्व-स्तरीय कार्डियक सर्जरी के मानकों को भारत में लाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।”
सर्जन विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से बताते हैं। ऑन-पंप ओपन-हार्ट सर्जरी दरअसल बाईपास की एक पारंपरिक तकनीक है, जिसमें कुछ समय के लिए हार्ट के काम-काज को रोक दिया जाता है, और एक हार्ट-लंग मशीन खून को शरीर में लाने व ले जाने का काम संभाल लेती है। इससे सर्जन को तसल्ली के साथ और बिना खून वाले हार्ट का ऑपरेशन करने में आसानी होती है। यह तरीका बेहद जटिल या वेसल्स से जुड़ी कई तरह की बीमारियों और वॉल्व की मरम्मत के लिए सबसे अच्छा है, जिसके तहत एक नियंत्रित माहौल में सबसे उम्दा सटीकता सुनिश्चित होती है।
ऑफ-पंप बाईपास सर्जरी, या बीटिंग हार्ट सर्जरी में दिल की धड़कन रोके बिना सर्जरी की जाती है और इसमें हार्ट-लंग मशीन का उपयोग नहीं किया जाता है। सर्जन केवल उसी हिस्से को स्थिर करते हैं जिस पर ऑपरेशन करना होता है, जिससे जोखिम और क्षति कम हो जाती है। यह तरीका ज़्यादा जोखिम वाले मरीजों (बुज़ुर्ग, डायबिटीज से जूझ रहे, या किडनी की समस्या वाले सभी मरीजों) के लिए सबसे बेहतर है और इसके फायदों में बहुत कम खून बहना, कम जटिलता दर, और ठीक होने में कम समय लगना शामिल है। यह तरीका उन मरीजों के लिए सबसे उपयुक्त है, जिनके हार्ट में ब्लॉकेज सीमित हैं या जो पारंपरिक ऑन-पंप सर्जरी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं।
बाइलेटरल इंटरनल मैमेरी आर्टरीज़ (BIMA) वास्तव में टोटल आर्टेरियल बाईपास सर्जरी की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें पैर की नसों के बजाय बाएँ और दाएँ, दोनों इंटरनल मैमेरी आर्टरीज़का उपयोग किया जाता है। इस विधि में लंबे समय तक कायम रहने वाले बेहतर परिणाम मिलते हैं, जिससे आर्टरीज़ लंबे समय तक खुली रहती हैं, ग्राफ्ट फेल्योर का जोखिम कम होता है, और मरीजों के जीवित रहने की दर भी बेहतर होती है। कम उम्र के मरीजों और स्थायी परिणामों की चाह रखने वाले लोगों के लिए यह तरीका सबसे उपयुक्त है।
मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS) में दिल का ऑपरेशन पसलियों के बीच किए गए छोटे चीरों (2-3 इंच) के माध्यम से होता है, जिससे छाती की हड्डी की चीर-फाड़ करने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। MICS में विशेष उपकरणों का उपयोग करके या रोबोट की मदद लेकर सटीकता सुनिश्चित की जाती है और आघात को कम करती है। इसके फ़ायदों में कम-से-कम निशान, खून का बेहद कम नुकसान, ठीक होने के समय में कमी, न्यूनतम दर्द और अस्पताल में कम समय तक रुकना शामिल है। इसका उपयोग बाईपास (MIDCAB), वॉल्व की मरम्मत और खराबी को दूर करने के लिए किया जाता है, जो पारंपरिक सर्जरी का बेहद सुरक्षित और तेज़ विकल्प है।
रोबोटिक कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी बहुत ही कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है, जिसमें अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का उपयोग करके 1-2 इंच के आकार वाले चीरों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। यह तरीका छाती की हड्डी की चीर-फाड़ किए बिना बहुत अधिक सटीकता, कम-से-कम निशान, न्यूनतम दर्द और ठीक होने के समय में कमी जैसे फायदे देता है। यह तरीका एकल या दोहरी वेसल्स की बीमारी वाले मरीजों के लिए सबसे बेहतर है, क्योंकि यह पारंपरिक बाईपास सर्जरी के शानदार परिणामों और बेहद कम चीर-फाड़ वाली तकनीक को साथ जोड़ता है।
हाइब्रिड कोरोनरी बाईपास सर्जरी में कोरोनरी रोग के इलाज के लिए बेहद कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी और स्टेंटिंग (PCI) को एक साथ मिलाया जाता है। LIMA ग्राफ्ट का उपयोग करके प्रमुख आर्टरी को बाईपास किया जाता है, जबकि दूसरे ब्लॉकेज का इलाज स्टेंट से किया जाता है, और यह सब ओपन-हार्ट सर्जरी के बिना ही किया जाता है। इस तरीके में कम क्षति, और जल्दी ठीक होने जैसे फायदे मिलते हैं, साथ ही यह मल्टी-वेसल बीमारी के लिए सबसे बेहतर है जिसमें केवल पूर्ण बाईपास या पूर्ण स्टेंटिंग से सर्वोत्तम परिणाम नहीं मिल सकते हैं। हाइब्रिड बाईपास में हर मरीज की ज़रूरत का ध्यान रखा जाता है, जो सर्जरी की सटीकता और इंटरवेंशन की सुविधा का बेहतरीन तालमेल होता है।
हार्ट फेल्योर में बाईपास सर्जरी मरीज की जान बचा सकती है, खासकर जब आर्टरीज में ब्लॉकेज की वजह से खून का बहाव कम हो जाता है और हार्ट अच्छी तरह काम नहीं करने लगता है। कम इजेक्शन फ्रैक्शन (HFrEF) और स्वस्थ हृदय की मांसपेशियों वाले मरीजों में, CABG से शरीर में खून का बहाव ठीक हो सकता है, हार्ट का कामकाज बेहतर हो सकता है, साथ ही साँस फूलने व थकान जैसे लक्षणों में कमी आ सकती है। इससे भविष्य में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम भी कम हो सकता है और जीवित रहने की दर को बेहतर बना सकती है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा सावधानी से की गई जाँच हर मरीज के लिए सबसे अच्छे परिणाम सुनिश्चित करती है।
डॉ. धीरेन शाह, सीनियर कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन कहते हैं, “इंसान की तरह उसका दिल भी उतना ही अनोखा होता है। बाईपास की सात अलग-अलग तकनीकों के विकास से हमें हर मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और कारगर तरीका चुनने में मदद मिलती है। यह सिर्फ़ सर्जरी नहीं है, बल्कि यह निजी जरूरतों के अनुरूप देखभाल के ज़रिए सटीक उपचार प्रदान करने, हमदर्दी जताने और उम्मीद जगाने के बारे में है। इस क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, और इन तकनीकों को मरीज के दिल की अनोखी संरचना, उससे जुड़े जोखिम और शारीरिक स्थिति के अनुरूप बनाया गया है। सर्जरी के विकल्पों का यह दायरा हमें ‘एक ही तरीका सब पर लागू’ होने वाले नज़रिये से आगे बढ़ने की ताकत देता है, जिससे हम मरीज की जान बचा सकते हैं और ज़्यादा सटीकता, सुरक्षा और हमदर्दी के साथ दिल को फिर से पहले जैसा बना सकते हैं। हर मामले में हमारा बस एक ही लक्ष्य रहता है: दिल को ठीक करना, और ध्यान रखना कि इसमें मरीज को किसी भी तरह का समझौता नहीं करना पड़े।”
बाईपास की ये सात अलग-अलग तकनीकें दिल की बीमारियों के उपचार में हुई प्रगति को दर्शाती हैं— जिसमें पारंपरिक ओपन सर्जरी से लेकर अत्याधुनिक, बेहद कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी और रोबोटिक तरीके शामिल हैं। हर तरीके को मरीज की बेहद खास शारीरिक बनावट और चिकित्सीय स्थिति के अनुरूप बनाकर, कार्डियक सर्जन उनकी सुरक्षा, सटीकता और लंबे समय तक सफलता के बेहतरीन मानकों को सुनिश्चित करते हैं। इन सभी इनोवेशन के मूल में एक ही सिद्धांत है: ऐसी व्यक्तिगत देखभाल, जिसमें मरीज को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है।
डॉ. धीरेन शाह का परिचय
डॉ. धीरेन शाह गुजरात में हार्ट एवं लंग्स ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें गुजरात के पहले हार्ट एवं लंग्स ट्रांसप्लांट सर्जन होने का गौरव प्राप्त है, जिन्होंने इस प्रदेश में ट्रांसप्लांट देखभाल में बड़े पैमाने पर बदलाव लाने में अमूल्य योगदान दिया है। डॉ. शाह ने 51 हार्ट ट्रांसप्लांट और 6 लंग्स ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करके दुनिया के जाने-माने कार्डियोथोरेसिक सर्जनों के बीच अपनी जगह बनाई है। 13,000 से ज़्यादा सफल ओपन-हार्ट सर्जरी का शानदार रिकॉर्ड रखने वाले डॉ. शाह को विश्व स्तर पर सबसे कुशल और भरोसेमंद कार्डियक सर्जनों में से एक माना जाता है। कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. शाह न्यूनतम चीर-फाड़ और छोटे चीरे वाली तकनीकों में अपनी सटीकता के लिए जाने जाते हैं, जिससे मरीजों को ठीक होने में कम समय लगता है और सर्जरी में कम दर्द का अनुभव होता है। वे TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन) और TAVR (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट) जैसी अत्याधुनिक स्ट्रक्चरल हार्ट प्रक्रियाओं में भी बेहद कुशल हैं। अपनी चिकित्सकीय उत्कृष्टता और गहरे अनुभव के लिए मशहूर, डॉ. धीरेन शाह अहमदाबाद के साथ-साथ भारत से बाहर भी सबसे कुशल कार्डियक सर्जनों में से एक माने जाते हैं, जिन पर उनके सहयोगियों के साथ-साथ मरीज भी समान रूप से भरोसा करते हैं।
